पीलीभीत/ माधोटांडा। शारदा नदी के पार 300 एकड़ सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर उगाई गई गन्ने की फसल को खरीदने के लिए नेपाली गन्ना तस्कर सक्रिय हो गए हैं। अवैध कब्जेदार गन्ने काटकर ट्रैक्टर ट्रालियों से इंडो-नेपाल सीमा तक ले जाते हैं और वहां से नेपाली तस्कर गन्ने नेपाल पहुंचा रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस गोरखधंधे की जानकारी वन और राजस्व विभाग को नहीं है, लेकिन संयुक्त सीमांकन न होने की बात कहकर दोनों ही विभाग सालों से पल्ला झाड़ते आ रहे हैं।
शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान और ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र में वन और राजस्व विभाग की करीब 500 एकड़ जमीन है। इस भूमि को लेकर दोनों विभागों द्वारा किए जा रहे दावों के चलते यहां किस विभाग की कितनी जमीन है, इसका आजतक हिसाब किताब नहीं हो सका है। दोनों विभागों के बीच खींचतान का फायदा यहां के भूमाफिया उठाते आ रहे हैं। ये भूमाफिया कई सालों से इस सरकारी जमीन पर साठगांठ के चलते अवैध कब्जा करके धान, गेहूं और गन्ने की फसल करते आ रहे हैं। इस बार इस सरकारी भूमि के करीब 300 एकड़ रकवे पर अवैध कब्जेदारों ने गन्ने की फसल उगाई है। इसकी इन दिनों तेजी से कटाई चल रही है।
..तो पर्चियां न मिलने पर गन्ने बेचते हैं नेपाली तस्करों को
शारदा पार इलाके की सरकारी जमीन पर पैदा की गई फसलों का सरकारी अभिलेखों में लेखाजोखा तो होता नहीं है। इसीलिए अवैध कब्जेदारों को गन्ने की पर्चियां भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में जमीन पर काबिज अवैध कब्जेदार गन्ने को नेपाली गन्ना तस्करों को बेंच रहे हैं। गन्ने की खरीदारी को इंडो-नेपाल बार्डर पर पिलर नंबर 28 और 29 के बीच गन्ना तस्कर तेजी से सक्रिय हो गए हैं।
इंडो-नेपाल बार्डर पर हो रही सौदेबाजी
सरकारी जमीन पर काबिज अवैध कब्जेदार गन्ने की फसलों को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर इंडो-नेपाल सीमा तक ले जाकर गन्ने तस्करों के हवाले कर देते हैं। यह गोरखधंधा इस दिनों बड़े पैमाने पर चल रहा है। सैकड़ों एकड़ वन भूमि और राजस्व विभाग की भूमि पर गन्ने की फसलें खड़ी हैं। हालांकि लखीमपुर जनपद की सीमा क्षेत्र से सटे ट्रांस शारदा क्षेत्र के कुछ माफिया गन्ने को खरीद रहे हैं। खास बात यह है कि इतना सब कुछ होते हुए भी दोनों विभाग खामोश बैठे हैं।
इस मामले की हाल ही में जानकारी मिली है। एसडीएम कलीनगर से वार्ता कर जल्द ही शारदा पार इलाके में राजस्व विभाग की भूमि का आंकलन किया जाएगा। ताकि सीमांकन आदि की कार्रवाई की जा सके। - विजय कुमार त्रिवेदी, तहसीलदार, कलीनगर