पीलीभीत। अमरनाथ यात्रा पर रवाना हुए पीलीभीत के जत्थे में शामिल 25 लोगों को तीन दिन के इंतजार के बाद सोमवार को बाबा बर्फानी के दर्शन हुए। सभी श्रद्धालु इससे बेहद उत्साहित हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए 110 श्रद्धालुओं का जत्था 30 जून को पीलीभीत से दो बसों पर सवार होकर निकला था। बादल फटने की घटना के चलते जत्था 8 जुलाई से शेषनाग में ठहरा था।
जत्थे में शामिल 85 लोग 10 जुलाई शाम वैष्णो देवी को रवाना हो गए। शेष 25 लोगों का जत्था सोमवार को सुबह छह बजे बाबा अमरनाथ की गुफा के लिए 11 जुलाई को सुबह रवाना हुआ। जत्थे में शामिल जगन्नाथ लोधी ने बताया कि दोपहर तीन बजे वह पहुंच गए थे और चार बजे जब गुफा बंद हुई तो उससे पहले ही उन्हें दर्शन हो गए। इससे उनके साथ उन सभी भक्तों की दर्शन की मनोकामना पूरी हो गई है। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद परिजन चिंता में आ गए थे और जत्थे में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के घरों से लगातार फोन आ रहे थे कि वापस लौट आओ।
अगले वर्ष दर्शन कर लेना। इस पर 85 लोगों ने बिना दर्शन के वापसी का निर्णय ले लिया लेकिन 25 लोगों दर्शन की ठानी थी। इसमें सोमवार को सफलता मिली अब यात्रा का मकसद पूरा हुआ और हम सभी उत्साहित होकर घर लौट रहे हैं। बालटाल से बस के जरिये जम्मू जाएंगे। शिपपुरिया निवासी महेंद्र पाल दर्शन करके लौट आए। उनके बेटे मनोज गंगवार ने पिता के आने से सभी खुश हैं, क्योंकि हादसे के बाद चिंता थी। लौटने पर महेंद्र पाल का तिलक करके पत्नी मिथलेश कुमारी ने स्वागत किया।
मीत, अर्पित और शिवेंद्र घर लौटे, किया स्वागत
बिलसंडा। दूसरे जत्थे में सुरेश सिंह, अजय, मिश्रा, श्याम मोहन, सूरज समेत दस लोग शामिल हैं। अजय मिश्रा ने बताया सोमवार सुबह उनके जत्थे ने यात्रा शुरू कर दी है। तीसरे जत्थे में शामिल अर्पित, मीत राठौर और पूरनपुर के शिवेंद्र कुमार वापस घर आ गए हैं। मीत राठौर जब अपने घर वापस आए तो उनकी मां ने उन्हें सीने से लगा लिया और अपना स्नेह न्योछावर करने लगी। मीत ने बताया कि बादल फटने की घटना सुनकर डर लगा था। बिलसंडा के एक जत्थे में शामिल प्रियंक तिवारी ने बताया कि उनके साथ अनुज, बंटी, धनोज सिंह, आशीष, विकास, समेत कई लोग शामिल है। उनका जत्था पहलगाम में ही अभी तक रुका हुआ है। संवाद
बाबा अमरनाथ के दर्शन करके वापस लौटता पीलीभीत के श्रद्धालुओं का जत्था। संवाद- फोटो : PILIBHIT