माधोटांडा (पीलीभीत)। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जहां बाढ़ को लेकर खतरा मंडराने लगा है, वहीं इस पर नाव से होने वाला सफर भी कब जानलेवा बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कोई अन्य रास्ता न होने की वजह इसी से आवागमन को शारदा पार के ग्रामीण मजबूर हैं। अभी एक दिन पूर्व ही शनिवार को एक नाव पलट गई थी। इसमें सवार चार दूधिया तैरकर खुद को बचा ले गए, लेकिन सवाल यह है कि अगर उनको तैराकी न आती होती तो क्या होता।
बरसात नजदीक आते ही शारदा नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद शारदा विकराल रूप धारण कर लेती है। तीन दिनों की बात करें तो लगातार जलस्तर बढ़ रहा हैै। बनबसा बैराज से 50 हजार क्यूसेक पानी शारदा में छोड़ा जा चुका है। जिसके चलते रमनगरा क्षेत्र के अंतर्गत दो अलग-अलग घाटों पर नावों का संचालन मुश्किल भरा होने लगा है। क्षेत्र के पट्टेदारों और अवैध कब्जेदारों का शारदा नदी के पार स्थित कृषि फसल के लिए खाद और कीटनाशक दवाई ले जाने के लिए रोज नाव के सहारे नदी के पार आना जाना लगा रहता है। ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने से अब छह माह तक नाव का सफर खतरों से भरा हो गया है।
रमनगरा क्षेत्र के अंतर्गत अलग-अलग क्षेत्र में दो घाटों की टाइगर रिजर्व ने नीलामी कर रखी है। वहीं मझारा गांव की सीमा में एक घाट विभागीय साठगांठ के चलते किया जाता है। वैसे तो रमनगरा क्षेत्र में शारदा नदी की चौड़ाई करीब ढाई से तीन किमी है। वर्तमान में नदी में जहां पहले मात्र एक धार होती थी, जिसके चलते शेष बचे क्षेत्र से लोग पैदल आवागमन करते थे, लेकिन पिछले दिनों से नदी का जलस्तर बढ़ जाने से नदी की धार भी बढ़ गई है। बीच में लगभग एक से डेढ़ किमी क्षेत्र को नाव के सहारे पार करने के बावजूद राहगीरों को नदी के बीचों-बीच में पैदल निकलना पड़ता है।
जलस्तर का अंदाजा लगाना मुश्किल
पहाड़ी नदी होने के चलते शारदा में जलस्तर कब बढ़ जाए और कब कम हो जाए, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है। वहीं वर्तमान में शारदा नदी के पार ग्राम समाज की भूमि के पट्टेदार और लंबे समय से टाइगर रिजर्व की भूमि पर कब्जे किए आ रहे अवैध कब्जेदारों के लिए इन दिनों का नाव का सफर जोखिम भरा है। कृषि भूमि की जुताई, खाद एवं कीटनाशक दवाइयों के अलावा रसद सामग्री के लिए रोजाना करीब 60-70 लोग इस पार से नाव के सहारे नदी को पार कर रहे है। सवारियों का नाव पर अधिक भार पड़ जाता है। ऐसे में जल्दबाजी में क्षमता से अधिक सवारियां बैठने के चलते सफर खतरे भरा रहता है।
बाढ़ के समय भी होता है नावों का संचालन
बरसात के समय शारदा नदी पूरी चौड़ाई में विकराल रूप धारण कर लेती है। उस दौरान भी नावों का संचालन जारी रहता है, यदाकदा क्षमता से अधिक सवारी बैठने के कारण नाव डूब भी जाती है। यह दीगर बात है कि नाव आवागमन करने वाले अधिकतर लोग बंगली व पूर्वांचल के है, जो तैरना जानते है। लेकिन सर्वाधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को होती है। हालांकि वर्षों पूर्व रमनगरा क्षेत्र में एक नाव डूबने से 14 लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें महिलाएं व बच्चे शामिल थे।
सवारियों से छह माह में की जाती है वसूली
क्षेत्र में संचालित रमनगरा व कंजरिया घाट पर नाव का संचालन किया जाता है। साल भर शारदा नदी के पार खेती करने वाले ग्रामीण व अवैध कब्जेदार नाव के सहारे अपने काम को अंजाम देते है। वहीं घाट का ठेकेदार ऐसे लोगों से छह माह में वसूली करता है।
जिम्मेदार बने रहते हैं अंजान
शारदा नदी पर पूरे साल लोगों का आवागमन जारी रहता है, चाहे जलस्तर कम हो या बाढ़ की स्थिति बनी हो। यही नहीं बाढ़ के समय पहाड़ों से विशाल वृक्ष नदी में बहकर आते हैं। ऐसे में नाव चलाने वाले नाविक और सवारियां नदी के बहाव पर नजर जमाकर नदी को पार करते हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात खराब ही बने रहते है। ऐसे में जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे जिम्मेदार इसपूरे मामले से अंजान बने रहते है। अफसरों द्वारा क्षेत्र में एक भी नाव का संचालन नहीं कराया जाता है।
शारदा का जलस्तर बढ़ने के बाद नाव का सफर सुरक्षित रहे, इसके लिए क्षमता के मुताबिक सवारी बैठाने को कहा गया हैै। संबंधित ग्राम पंचायत स्तर से अतिरिक्त नाव की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं। प्रशासन भी इस पर गंभीरता से निगाह रख रहा है।
- जंग बहादुर सिंह, एसडीएम, कलीनगर