30 मार्च, 2019: कार में आग लगने से पांच लोग जिंदा जले थे
न्यूरिया के ससुर-दामाद समेत पांच लोग बरेली से लौट रहे थे। जतीपुर के पास नेपाली बस से कार की टक्कर की हो गई और दोनों वाहन खाई में चले गए थे। कार में आग लग गई थी। इससे कार सवार पांचों लोगों की जिंदा जलकर मौत हुई थी। उनके शव भी पहचान लायक नहीं बच सके थे। इस हादसे में भी वाहनों की रफ्तार और हाईवे किनारे लगे मिट़्टी के ढेर से दुर्घटना की वजह सामने आई थी। हादसों के कुछ दिनों तक तो सुधार कराने को लेकर दावे किए जाते रहे, मगर इसके बाद नतीजतन शून्य हो गया।
26 जुलाई, 2019, पूर्णागिरी से दर्शन कर लौटते समय सात की गई थी जान
अलीगढ़ के छर्रा निवासी 25 वर्षीय हरदेश शर्मा पुत्र रामेश्वर दयाल, उनकी पत्नी 23 वर्षीय पल्लवी, एक साल का बेटा उत्कर्ष, तीन वर्षीय पुत्री आराध्या, 28 वर्षीय राजीव, उनकी पत्नी सविता, एक साल की बेटी भक्ति, 27 वर्षीय रिशांत पुत्र हरिओम शर्मा सभी लोग आल्टो कार से उत्तराखंड के मां पूर्णागिरी धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। जतीपुर-खमरिया पुल के बीच पहुंचते ही सामने से आ रही टनकपुर डिपो की बस से आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इसमें कार सवार सात लोगों की मौत हो गई, जबकि मासूम उत्कर्ष घायल हो गया। हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार व घटनास्थल पर लगा मिट्टी का ढेर सामने आई।
दिनांक 22 जून 2022
हरिद्वार से लखीमपुर जा रही गाड़ी (टाटा ऐस) भले ही चालक को झपकी आने के बाद अनियंत्रित होकर खाई में गिरी हो, मगर अगर हाईवे किनारे बड़ा से गड्ढा नहीं होता और फुटपाथ पक्का होता तो शायद चालक गाड़ी को नियंत्रित कर लेता और मासूमों समेत दस लोगों में से कुछ की जान बच गई होती। मगर लापरवाही का आलम ऐसा कि जिम्मेदारों को कोई परवाह भी नहीं। लोगों के मुताबिक इतने बड़े हादसे का मुख्य कारण हाईवे किनारे बना गढ्डा है। इससे गाड़ी गड्ढा में जाते की खाई में चली गई और दस लोगों की मौत हो गई।