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पुलिसवाले उलझते रहे, वो तड़प के मर गया

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कार्यक्षेत्र को लेकर जीआरपी और आरपीएफ के बीच विवाद में रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की जान चली गई। काफी देर तक तड़पने के बाद यात्री ने दम तोड़ दिया। हालांकि बाद में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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मौत की वजह ह्दय गति रुकना बताया गया है। रविंद्र पुत्र बलबीर की आयु करीब 40 वर्ष है। सुबह वह खतौली के गांव शेखपुरा से मुजफ्फरनगर आया था। घर लौटने के लिए वह रेलवे स्टेशन पर पहुंचा।
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आपस में लड़ते रहे स‌िपाही

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक वह प्लेटफॉर्म पर गिरकर तड़पने लगा। इस प्रकार गिरने से आसपास के काफी यात्री जमा हो गए।

कुछ ही दूर खड़े जीआरपी और आरपीएफ के सिपाहियों ने पास आकर यात्री की हालत देखी और एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर लौट गए।

काफी देर तक तड़पने के बाद वह शांत हो गया। इसके बाद जीआरपी के सिपाही वहां पहुंचे और यात्री को उठाकर जिला अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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दोनों के ही कार्यक्षेत्र है

डॉक्टरों ने जांच में पाया कि ह्दय गति रुकने से यात्री की मृत्यु हुई है। जीआरपी ने परिजनों को बुलाकर शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। स्टेशन अधीक्षक मनमोहन सिंह त्यागी का कहना है फोर्स अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं कर रही है।

इसका परिणाम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे एक्ट के अनुसार घायल व्यक्ति को उपचार दिलाने का जिम्मा आरपीएफ का है। मृतकों का पोस्टमार्टम का जिम्मा जीआरपी का है।

गंभीर रूप से घायल यात्री अक्सर इसमें जान गंवाते हैं, क्योंकि आरपीएफ गंभीर रूप से घायल यात्री को जीआरपी पर टालने के लिए उपचार देने में देरी करती है।
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