बहराइच में महसी तहसील के टिकुरी गांव के ग्राम प्रधान ने विकास कार्यों के लिए मिले तीन लाख रुपये से घाघरा नदी में एक किलोमीटर सड़क बनवा दी।
जहां सड़क बनवाई गई है, उस इलाके को घाघरा ने दो वर्ष पूर्व छोड़ दिया था, लेकिन बरसात में नदी का दायरा बढ़ने पर यह क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न होता है। 15-20 फुट तक पानी भरा रहता है। सूचना मिलने पर खंड विकास अधिकारी ने काम रुकवा दिया है।
बेलहा-बेहरौली तटबंध के दूसरी ओर बसा टिकुरी गांव घाघरा नदी के तट पर स्थित है। इस गांव से सटे हुए डेढ़ किमी के क्षेत्र में दो वर्ष पूर्व घाघरा बहती थी। धीरे-धीरे बहाव का रुख बदल गया, जिससे इस इलाके में सिर्फ रेत ही बची है। लेकिन जुलाई-अक्तूबर के बीच नदी उफनाने पर यह इलाका भी पूरी तरह जलमग्न रहता है।
ऐसे में इस इलाके में किसान सिर्फ नवंबर से मार्च माह तक गेहूं और मसूर की खेती करते हैं। इलाके में सड़क का कोई औचित्य नहीं है, इसके बावजूद टिकुरी की ग्राम प्रधान सुनंदा देवी ने एक किलोमीटर सड़क की पटान करवा दी है। बाढ़ आने पर इस सड़क का कहीं अता-पता नहीं लगेगा। मामला सुर्खियों में आने के बाद काम रुकवा दिया गया है।
'घाघरा के कछार में कच्ची सड़क की पटान के लिए ग्राम प्रधान ने मनरेगा के तहत प्रस्ताव बनवाया था। लगभग 120 मजदूरों ने काम किया है, लेकिन गलत तरीके से सड़क बनवाए जाने के चलते रोक लगाई गई है।'
- एनएन मिश्र, खंड विकास अधिकारी