सांप्रदायिक हिंसा के बाद जिले के तीन गांवों से पलायन कर राहत शिविरों में आए मुस्लिम परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की मदद देने की घोषणा के बाद एकल परिवारों की दावेदारी बढ़ गई है।
लिहाजा सर्वे कर रहे अफसर मकानों को खुलवाकर चूल्हे भी चेक कर रहे हैं। वह नहीं चाहते कि जांच में कोई चूक हो। अपर जिलाधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया ने बताया कि अभी पहले चरण का सर्वे हो रहा है। रिपोर्ट आने के बाद उच्चाधिकारियों से उसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही पात्रों की सूची फाइनल होगी।
सांप्रदायिक हिंसा के बाद अपने गांव से पलायन कर चले गए लांक, लिसाढ़ और बहावड़ी के मुस्लिम परिवारों को सरकार ने आशियाना बनाने के लिए पांच-पांच लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने पात्रों का चयन करने के लिए गांवों में सर्वे शुरू करा दिया।
तहसील प्रशासन के अलावा विकास विभाग की टीमें गांव में जाकर सर्वे कर रही हैं। बात पांच लाख रुपये की है, इसलिए संयुक्त रूप से रहने वाले परिवार भी एकल होने का दावा करने लगे हैं।
इसकी पुष्टि के लिए अधिकारियों ने इनके घरों में चूल्हों की जांच भी की। नायब तहसीलदार शामली मदन राठौर के अनुसार उन्होंने बहावड़ी में खुद सर्वे किया है। सर्वे का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है, जिसके बाद बहावड़ी में करीब 178 परिवार पात्रता के दायरे में बैठ रहे हैं।
लांक में यह संख्या 244 के आसपास है। लिसाढ़ में भी काम जारी। तहसीलदार शामली ने बताया कि सर्वे का फाइनल दौर में है। रिपोर्ट तैयार हो रही है। उम्मीद है कि शनिवार तक यह सब फाइनल हो जाएगा।