यह किसी बाहुबली विधायक की महिमा का मंडन नहीं, बल्कि ढीली व्यवस्था का जीता-जागता नमूना है। यह व्यवस्था बिकरु गांव में विकास दूबे, ज्ञानपुर में विजय मिश्रा, गाजीपुर में मुख्तार अंसारी, बनारस परिक्षेत्र में बृजेश सिंह, विनीत सिंह, फैजाबाद में अभय सिंह को पैदा कर देती है। विजय मिश्रा को 2009 में मुलायम सिंह की सभा से पकड़ने गए एक उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी के मुताबिक बाहुबली पल भर में सारा घटनाक्रम बदल देने में माहिर हैं। यह कम लोगों को पता होगा कि विजय मिश्रा को राजनीति में पौध रोपण करने वाले बनारस क्षेत्र के दिग्गज नेता पंडित कमला पति त्रिपाठी थे।
विजय मिश्रा वैसे तो धानापुर गांव से हैं। बनारस से 50 किमी दूर भदोही। 1980 में पेट्रोल पंप आवंटित हुआ। ट्रकों को खरीदकर ट्रांसपोर्ट के धंधे में उतर आए। व्यवहार से थोड़ा दबंग किस्म के हैं। धाकड़ हैं। देवी के भक्त हैं। साल में दो बार नवरात्र का व्रत, पूजापाठ, बड़े पैमाने पर यज्ञ कराना, खुद उसमें निष्ठा के साथ शामिल होते हैं। भदोही कालीन के व्यापारियों का क्षेत्र है। इसकी भौगोलिक स्थिति निराली है। प्रयागराज और बनारस जैसी दो बड़ी कमिश्नरियों के बीच में बसा यह छोटा सा कस्बा संपन्न रहा है।
मुलायम सिंह यादव से नजदीकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2009 में भदोही में उपचुनाव चल रहा था। मंच पर मुलायम सिंह यादव थे। मंच से ही विजय मिश्रा ने मायावती की सरकार से अपनी जान का खतरा बताते हुए मुलायम सिंह से रामलली (पत्नी) के सुहाग के रक्षा की गुहार लगा दी।
मायावती के समय में प्रभावशाली रहे एक नौकरशाह ने माना कि यदि मुलायम सिंह यादव ने यहां पहल न की होती तो विजय मिश्रा गिरफ्तार कर लिए जाते। पुलिस सभास्थल पर ही मंच से नीचे उतरने का इंतजार कर रही थी। लेकिन इतना कहते ही मुलायम सिंह यादव ने अभय दान दे दिया। सभा को संबोधित करने के बाद विजय मिश्रा को हेलीकाप्टर में साथ बिठाया और लेकर उड़ गए।
2010 में बसपा नेता नंद गोपाल नंदी पर जानलेवा हमला हुआ था। इसमें नंदी की किसी तरह जान बच गई, सहयोगी और एक पत्रकार की इसमें मारे गए थे। तब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी। विजय मिश्रा कहते हैं कि इसके बाद उनके ऊपर मुकदमों की झड़ी लग गई। इससे पहले 2009 में उन्हें मुलायम सिंह यादव के साथ हेलीकाप्टर से भागना पड़ा था।
इसके बारे में विजय मिश्रा के करीबी कहते हैं कि मायावती विजय मिश्रा पर दबाव डालकर राजनीतिक सहायता और बसपा प्रत्याशी जितवाना चाहती थीं, लेकिन अक्खड़ मिश्रा ने मना कर दिया।
2012 में विधानसभा चुनाव होना था। मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। विजय मिश्रा मुख्यमंत्री के सीधे निशाने पर थे। पुलिस गिरफ्तारी की भरसक कोशिश में थी। विजय मिश्रा को पता था कि आसानी से आत्मसमर्पण मुश्किल है। साधू के वेश में दाढ़ी बढ़ाकर कोर्ट परिसर में पहुंच गए। अदालत में आत्मसमर्पण के बाद लोग समझ पाए। इतना ही नहीं विजय मिश्रा ने 2012 के विधानसभा चुनाव का पर्चा भरा। बसपा ने भी ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन जेल में रहकर विधायकी जीत गए।
विजय मिश्रा खुद को अपराधी नहीं मानते। हालांकि उनके खिलाफ करीब 73 मामले दर्ज हैं। वह कहते हैं 80 के दशक से जन सेवक हैं। जनता उनके साथ है। चार बार के विधायक हैं। गलत होते तो जनता क्यों चुनती? उन्होंने खुद बताया था कि 80 के दशक से कारोबारी प्रतिद्वंदी चमकाने, धमकाने लगे थे। वह किसी के आगे झुके नहीं। बातचीत में वह कई बार मिठास के साथ परशुरामी अंदाज में भी दिखाई देते हैं। दिलचस्प है कि क्षेत्र के किसी माफिया की परवाह नहीं करते।
2017 के विधानसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार विजय मिश्रा पर 16 के करीब अपराधिक मामले दर्ज थे। ये मामले हत्या, हत्या के प्रयास, अपराधिक षडयंत्र रचने, अपराधियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर किस्म के थे। कुछ लोगों का कहना है कि बुलंदशहर जेल में मारा गया प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी भी उनकी इज्जत करता था। विजय मिश्रा के बारे में कहा जाता है कि वह गाजीपुर के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के प्रमुख रणनीतिकारों में थे। मिर्जापुर से लेकर तमाम क्षेत्रों अंसारी के लिए काम करना, गुर्गों को शरण दिलाना सबकुछ विजय मिश्रा के भरोसे चलता था।
विजय मिश्रा को सत्ता और सत्ता के नायकों से टकराने में उन्हें ज्यादा संकोच नहीं होता। करीबियों का कहना है कि खतरे का अंदेशा उन्हें समय पर हो जाता है। उनके भेदिए हर जगह फैले हैं। सूत्रों का कहना है कि सूचनाओं का संकलन और उससे निकलने वाले संकेतों को पहचानने के बाद अगला कदम उठाने में वे जरा भी देर नहीं लगाते।
बताते हैं उनके पास 2009 में मायावती के पक्ष में झुकने का विकल्प था, लेकिन टकरा गए। 2017 में जब अखिलेश यादव ने टिकट काटा तो समाजवादी पार्टी को यादवों की पार्टी बताकर कोसने से नहीं चूके। यहां तक कह दिया कि मुलायम और समाजवादी पार्टी का जब तक मतलब रहता है, तब तक साथ देती है।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि भाजपा में भी विजय मिश्रा के हितैषियों की भरमार है। वह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश भाजपा नेताओं में पैठ रखते हैं। लेकिन एक आदत सत्ता से टकराने की है। विजय मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से टकराने में भी संकोच नहीं किया। पहले उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अफसरों, सलाकारों की आलोचना की, बाद में मुख्यमंत्री के शासन को ही ठाकुरवाद से भरा हुआ बता डाला।
विजय मिश्रा को मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बड़ा सवाल है कि वह दो दिन पहले भदोही में थे। मीडिया के सामने उन्होंने जान का खतरा बताया था। इस बार गिरफ्तारी उनके ही रिश्तेदार कमलेश तिवारी द्वारा दर्ज कराई शिकायत पर हुई है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा कुछ और है। क्षेत्र में अपराध पर निगाह रखने वालों का मानना है कि इस गिरफ्तारी के पीछे बृजेश सिंह, विनीत सिंह, सुशील सिंह जैसे लोगों का भी हाथ है।
खुद विजय मिश्रा ने भी मध्य प्रदेश से इसी तरह का बयान दिया है। बताते हैं योगी सरकार की निगाह में विजय मिश्रा पहले से चढ़े हुए थे। दूसरे उनकी गिरफ्तारी को मुख्तार अंसारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बताते हैं कि मुख्तार के करीबियों पर शिकंजा कस रहा है। यह शिकंजा अभी फैजाबाद के अभय सिंह तक भी जा सकता है।