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मायानगरी मुंबई के लिए चुनौती बन सकती है यूपी की फिल्म सिटी, सरकार के फैसले से लोगों में खुशी की लहर

Sat, 19 Sep 2020 11:42 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
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जल्द ही यूपी न सिर्फ हिंदी बल्कि देश-विदेश की अन्य भाषाओं के फिल्म निर्माण का बड़ा हब बनकर उभर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से यूपी बॉलीवुड के फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों व कलाकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है, उसे देखते हुए प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा मुंबई के लिए चुनौती बन सकती है। खास बात यह भी है कि सिर्फ यमुना एक्सप्रेस-वे, ग्रेटर नोएडा व नोएडा के इर्द-गिर्द ही नहीं बल्कि लखनऊ, वाराणसी व आगरा में भी फिल्म निर्माण की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
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फिल्म सिटी के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी से 1000 एकड़ भूमि मांगने के साथ-साथ इसे मूर्त रूप देने के लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।राजनीतिक लिहाज से भी यूपी में देश की सबसे खूबसूरत फिल्म सिटी की स्थापना करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा को एक बड़ा दांव माना जा रहा है। पहले डिफेंस कॉरिडोर और अब फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा से रोजगार के काफी अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। 

 मौजूदा समय में मुंबई के फिल्म उद्योग को सबसे बड़े फिल्म उद्योग का दर्जा हासिल है। राजस्व के लिहाज से भी यह महाराष्ट्र के लिए अहम है। फिल्म सिटी की स्थापना के बाद अगर फिल्म उद्योग से जुड़े लोग यूपी का रुख करते हैं तो निश्चित तौर पर यह महाराष्ट्र के लिए बड़ा झटका हो सकता है। इस समय यूपी में हर साल लगभग 100 फिल्मों की शूटिंग हो रही है। अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद बॉलीवुड में चल रही खेमेबंदी और उठापटक को देखते हुए यूपी सरकार की ओर से बड़ी फिल्म सिटी बनाने की घोषणा काफी कारगर साबित हो सकती है।
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सीएम योगी की घोषणा पर जिस तरह फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं। फिल्म उद्योग से जुड़े लोग इसे उत्तर भारत के लिए बड़ी सौगात मान रहे हैं। हाल के दिनों में छोटे शहरों की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्में काफी सफल रही हैं। इस लिहाज से भी यूपी में फिल्म सिटी के लिए काफी संभावनाएं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यूपी में फिल्म सिटी बनने से प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत के नए कलाकारों को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।

फिल्म निर्माता-निर्देशकों के लिए इसलिए भी मुफीद
फिल्म निर्माता-निर्देशकों को शूटिंग के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतें, उत्तराखंड की पहाड़ी वादियां और पंजाब के हरे-भरे खेत सहज ही आकर्षित करते हैं। आगरा का ताजमहल और आसपास का इलाका भी उन्हें लुभाता है। ऐसे में यमुना एक्सप्रेस-वे, ग्रेटर नोएडा व नोएडा के इर्द-गिर्द फिल्म सिटी बनने से  निर्माता-निर्देशकों को उनकी पसंदीदा जगहों के लिए सीधा एप्रोच होने की वजह से उन्हें सुविधा रहेगी। 

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे पर प्रस्तावित बड़ी फिल्म सिटी के अलावा लखनऊ, वाराणसी व आगरा में से किसी जगह एक अन्य छोटे आकार की फिल्म सिटी की स्थापना भी की जा सकती है। यह फिल्म सिटी 200-250 एकड़ में बनाने की योजना है। आगरा में पहले एक फिल्म सिटी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए यूपीसीडा ने जमीन भी चिह्नित कर ली थी। इसका भी परीक्षण कराया जा रहा है। वाराणसी में पर्यटन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर फिल्म सिटी बनाने के संबंध में अध्ययन कराया जा रहा है। लखनऊ के आसपास भी स्थान देखा जा रहा है।  

कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू
मुख्यमंत्री के एलान के बाद सूचना विभाग ने बड़े फिल्म सिटी के निर्माण के लिए कंसल्टेंट चयन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंन्ट्रेस्ट (ईओआई) मांग लिया है। जल्द ही कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया पूरी करके  फिल्म सिटी के निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा। उद्योग विभाग एवं अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इसका निर्माण कराने की  रूपरेखा तैयार की गई है।

जल्द ही योगी से मिलेंगे फिल्म उद्योग से जुड़े लोग
सूत्रों के अनुसार फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर प्रस्तावित फिल्म सिटी के प्रारूप पर चर्चा करेगा। इसमें निर्माता, निर्देशक, कलाकार तथा फिल्म निर्माण से संबंधित अन्य लोग शामिल होंगे। इनके सुझावों के आधार पर फिल्म सिटी को मूर्त रूप दिया जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट भी बनेगा मददगार
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि दिल्ली से नजदीक होने के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा या यमुना एक्सप्रेस-वे पर फिल्म सिटी का निर्माण तो फायदेमंद रहेगा ही, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इसमें खासा मददगार साबित होगा।

फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने को कई सहूलियतें

नई फिल्म नीति के तहत प्रदेश में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई सहूलियतें दी जा रही हैं। प्रदेश में बनने वाली हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों को लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम दो करोड़ रुपये अनुदान दिया जाता है। क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। फिल्म में अगर प्रदेश के पांच कलाकार हैं तो 25 लाख रुपये अतिरिक्त व सभी कलाकार प्रदेश के हैं तो 50 लाख रुपये अतिरिक्त देने का प्रावधान है। इसके अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी गठित है। पर्यटन विभाग के होटलों व अन्य संपत्तियों में 25 प्रतिशत छूट की व्यवस्था है।

हर साल 150 से 200 करोड़ खर्च
प्रदेश में फिल्म निर्माण पर हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। फिल्म बंधु के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में डेढ़ करोड़ से लेकर 40-50 करोड़ रुपये तक के बजट की फिल्मों का निर्माण हो रहा है। योगी सरकार में 2017 से लेकर अब तक 38 फिल्मों को लगभग 21 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।

अपर मुख्य सचिव सूचना एवं अध्यक्ष फिल्म बंधु, उप्र, अवनीश अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टर्स समिट में कई नीतियों में बदलाव का एलान किया था। इसी के तहत फिल्म नीति में भी बदलाव किया गया है। नीति के तहत ही फिल्म सिटी बनाने का निर्णय किया गया है। फिल्म जगत की कई हस्तियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर इसकी मांग की थी।

फिल्म सिटी के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण से 1000 एकड़ जमीन मांगी गई है। इसके साथ ही लखनऊ, वाराणसी व आगरा में भी एक फिल्म सिटी बनाने के  लिए अध्ययन कराया जा रहा है। कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया पूरी होते ही फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों से राय-मशविरा लेकर फिल्म सिटी का काम शुरू कराया जाएगा।

सांसद एवं फिल्म अभिनेता, रवि किशन ने कहा कि फिल्म सिटी के रूप में एक काफी पुराना सपना पूरा होने जा रहा है। यूपी और बिहार का युवा सम्मान और स्वाभिमान से काम करना चाहता है। मुख्यमंत्री योगी ने युवाओं को यह मौका दिया है। अभी तक फिल्म निर्माण के लिए मुंबई या हैदराबाद ही मुख्य स्थान हैं। देश-विदेश के फिल्मकार विकल्प चाहते हैं और यूपी की फिल्म सिटी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

इससे स्थानीय स्तर पर लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और उत्तर भारत के  कलाकारों को बेहतर माहौल के साथ उचित प्लेटफॉर्म मिल सकेगा। हिंदी हार्टलैंड में हिंदी फिल्में बन सकेंगी। प्रशिक्षण केंद्र भी खुलेगा जहां युवा प्रशिक्षित किए जा सकेंगे। युवाओं के लिए यह बड़ी खुशी की बात है।

उत्तर भारत के लोगों के लिए वरदान सिद्ध होगी यूपी फिल्म सीटी : मनोज तिवारी

सांसद, अभिनेता, गायक, मनोज तिवारी ने कहा कि यूपी की फिल्म सिटी पूरे उत्तर भारत के लोगों के लिए वरदान सिद्ध होगी। इस दूरगामी सोच के लिए सीएम योगी को मैं साधुवाद देना चाहता हूं। यह कदम न सिर्फ नई प्रतिभाओं को तराशने वाला होगा बल्कि सिनेमा के इतिहास व संवर्धन के लिए हिंदी क्षेत्र में इस स्तर की फिल्म सिटी किसी वरदान से कम नहीं होगी। पर्यटन व अन्य क्षेत्रों का विकास होगा। फिल्म निर्माण से संबंधित हर क्षेत्र की प्रतिभाओं को सजाने-संवारने का पूरा मौका मिलेगा।


अभिनेत्री, कंगना रणोत ने कहा कि यह गलत धारणा है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री भारत में पहले स्थान पर है। सच ये है कि तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री ने खुद को सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया है और अब यह पूरे भारत में अलग-अलग भाषाओं में फिल्में वितरित कर रही है। हिंदी की कई फिल्मों की शूटिंग रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद में होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यूपी में फ्लिम सिटी बनाने के फैसले की मैं प्रशंसा करती हूं। हमें फिल्म उद्योग में कई बड़े सुधार की जरूरत है। सबसे पहले तो अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री को एक बड़ी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के रूप में विकसित करने की जरूरत है। हम हॉलीवुड से प्रेरणा ले सकते हैं जो कि एक बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है और वहां कई फिल्म सिटी हैं।

लखनऊ के लुक में जितनी विविधता है, वह काफी कम शहरों में मिलती है। फिल्म का निर्देशक कस्बाई लुक दिखाना चाहे या फिर गलियों से घिरा पुराना शहर, खूबसूरत कोठियां या फिर शानदार चमचमाती सड़कें, सब कुछ चंद कदम के फासले पर हैं। उसे अगर ऐसे सीन दिखाने के लिए सेट लगाना पड़े तो शर्तिया करोड़ों रुपये खर्च हो जाएंगे। वहीं आजकल लखनऊ सहित यूपी या दूसरे हिंदी भाषी प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनने वाली फिल्में दर्शक खूब सराह रहे हैं। इनके निर्माता फिल्मों की शूटिंग महंगे लोकेशन या फिर नकली सेट पर करने के बजाय लखनऊ जैसे महानगरों में करने को वरीयता देते हैं। साथ ही काफी संख्या में बॉलीवुड में काम करने वाले टेक्नीशियन और जूनियर कलाकार यहीं के हैं। वे यहां शूटिंग के नाम पर तुरंत तैयार हो जाते हैं, क्योंकि काम के साथ उनका घर आना भी हो जाता है।
-विवेक प्रकाश, गायक व संगीतकार
 
लखनऊ में एक छोटे संस्कारित शहर से लेकर बड़े शहर तक का खाका बड़ी आसानी से खींचा जा सकता है। यहां की रियल लोकेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कलाकारों को ठहराने के लिए अच्छे होटल, आवागमन आदि की सुविधा भी बहुत अच्छी है। सरकार और प्रशासन का सहयोग भी बॉलीवुड के निर्माताओं के लखनऊ आने की एक खास वजह है। एक बार जो यहां आया वह यहीं का हो गया। अनुभव सिन्हा जैसे निर्माता-निर्देशक ने यहां एक फिल्म ‘मुल्क’ की तो उसके बाद अभी तो पार्टी शुरू हुई, अर्टिकल-15 और थप्पड़ भी यहीं शूट की। निखिल आडवाणी जो लखनऊ सेंट्रल करने आए थे, बाद में बाटला हाउस, इंदू की जवानी, हंसमुख, सत्यमेव जयते (जल्दी ही शूटिंग शुरू होगी) कर रहे हैं। लखनऊ बड़ा ही खूबसूरत शहर है, विजुअली रिच है। यहां के लोगों का सपोर्टिंग नेचर भी शूटिंग का प्लस प्वाइंट है। पुराने लखनऊ में खासकर चौक, कैसरबाग, इमामबाड़ा, नक्खास, पक्का पुल आदि इलाके निर्माताओं की पसंदीदा लोकेशन हैं। मुंबई वाले यहां की नवाबी वास्तुकला के मुरीद हैं।  
- अरुण सिंह ‘डिक्की’, लाइन प्रोड्यूसर
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गायक व संगीतकार विवेक प्रकाश ने कहा कि लखनऊ के लुक में जितनी विविधता है, वह काफी कम शहरों में मिलती है। फिल्म का निर्देशक कस्बाई लुक दिखाना चाहे या फिर गलियों से घिरा पुराना शहर, खूबसूरत कोठियां या फिर शानदार चमचमाती सड़कें, सब कुछ चंद कदम के फासले पर हैं। उसे अगर ऐसे सीन दिखाने के लिए सेट लगाना पड़े तो शर्तिया करोड़ों रुपये खर्च हो जाएंगे।

वहीं आजकल लखनऊ सहित यूपी या दूसरे हिंदी भाषी प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनने वाली फिल्में दर्शक खूब सराह रहे हैं। इनके निर्माता फिल्मों की शूटिंग महंगे लोकेशन या फिर नकली सेट पर करने के बजाय लखनऊ जैसे महानगरों में करने को वरीयता देते हैं। साथ ही काफी संख्या में बॉलीवुड में काम करने वाले टेक्नीशियन और जूनियर कलाकार यहीं के हैं। वे यहां शूटिंग के नाम पर तुरंत तैयार हो जाते हैं, क्योंकि काम के साथ उनका घर आना भी हो जाता है।

लाइन प्रोड्यूसर, अरुण सिंह ‘डिक्की’ ने कहा कि लखनऊ में एक छोटे संस्कारित शहर से लेकर बड़े शहर तक का खाका बड़ी आसानी से खींचा जा सकता है। यहां की रियल लोकेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कलाकारों को ठहराने के लिए अच्छे होटल, आवागमन आदि की सुविधा भी बहुत अच्छी है। सरकार और प्रशासन का सहयोग भी बॉलीवुड के निर्माताओं के लखनऊ आने की एक खास वजह है। एक बार जो यहां आया वह यहीं का हो गया।

अनुभव सिन्हा जैसे निर्माता-निर्देशक ने यहां एक फिल्म ‘मुल्क’ की तो उसके बाद अभी तो पार्टी शुरू हुई, अर्टिकल-15 और थप्पड़ भी यहीं शूट की। निखिल आडवाणी जो लखनऊ सेंट्रल करने आए थे, बाद में बाटला हाउस, इंदू की जवानी, हंसमुख, सत्यमेव जयते (जल्दी ही शूटिंग शुरू होगी) कर रहे हैं। लखनऊ बड़ा ही खूबसूरत शहर है, विजुअली रिच है। यहां के लोगों का सपोर्टिंग नेचर भी शूटिंग का प्लस प्वाइंट है। पुराने लखनऊ में खासकर चौक, कैसरबाग, इमामबाड़ा, नक्खास, पक्का पुल आदि इलाके निर्माताओं की पसंदीदा लोकेशन हैं। मुंबई वाले यहां की नवाबी वास्तुकला के मुरीद हैं।  
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