मोरना। मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहा राम चरित मानस में हमारा लक्ष्य दिव्य शुकदेव हैं। जो अपनी बात ना कहे और गुरु की आज्ञा निभाए, वही परम शिष्य है। गुरु अपने शिष्य को जो सिखाता है, वही सीखेगा। गुरु मुख से निकले वचन सर्वश्रेष्ठ हैं। शुक तोते को देखो तो वह गुरु की वाणी बोलता है।श्रीराम कथा समिति की ओर से भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में राम कथा के तीसरे दिन
मानस मर्मज्ञ ने कहा कि सूर्य की तरह प्रकाशमय हो जाए, तब भी परम सत्य नारायण का ध्यान रखना होगा। भगीरथी गंगा और भागवत कथा का मूल स्थान नारायण हैं। गुरु मुखी शास्त्र जिसको मिला, वह शास्त्र विस्तार कर सकता है। भागवत की गंगा आई नारद जी की वजह से। व्यास जी दुखी थे शांति नहीं मिल रही थी तो उन्होंने व्यास जी को भागवत दी।
भगवान में आपकी निष्ठा ही मानस धरा की रीत है। राम शिव की कल्पना कर दूसरों का हित कैसे हो इसका चिंतन करें। गलत आदमी की शरणागति विनाश कराती है। सोलह वर्ष की आयु में शुकदेव जी शुकतीर्थ में प्रकट हुए। व्यापक आदमी के रूप में हजारों साधु संतों को गंगा किनारे भागवत ज्ञान का बोध कराया। तब संसार के लोगों ने जाना।
साधु संगत करो, घर में पवित्रता प्रकट हो जाएगी घर का कोना-कोना महकेगा। संत दर्शन से उद्धार होगा। सूर्य ज्ञान का और धरती भक्ति का प्रतीक है। विद्वानों की परीक्षा भागवत में है, जिसको कथा का व्यसन लग जाए उसकी सद्गति पक्की है।
जिस सभा में गुरु और परमात्मा की चर्चा न हो ऐसी सभा में न जाए। जीवन में दगा की कोई जगह नहीं। सत्य के शरणागत हो जाइए, नीति को पकड़े रखिए। दृढ़ नियम से स्वामी कल्याणदेव ने सवा सौ साल तक समाज की निष्काम सेवा की।
एकांत में प्रभु भजन किया और त्याग को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि सातवां अध्याय नहीं होता तो गीता आगे नहीं बढ़ती। राजा परीक्षित शुकदेव जी के शरणागत हुए, तभी मुक्त हुए। मन की पांच गांठें होती हैं, इनसे निपटने के लिए भागवत कथा सुनें। युधिष्ठिर न्याय, अर्जुन विजय, भीम मन बाध्यकर्ता, सहदेव एवं नकुल रोग मुक्ति के प्रतीक हैं।
धन्य है वह प्राणी जो कलियुग में ध्यान करता है। 126 साल तक श्री कृष्ण भूमंडल पर रहे। कोई तत्व अनंत नहीं। आपके गुरु ने नाम की दीक्षा दी, निरंतर जप करो। आपकी जहां निष्ठा हो वही करो।
चारों युग में नाम की महिमा रही। राम चरित का सृजन शिव जी ने किया। ग्रंथ रूपी हृदय में बसा लिया।
राम कथा सुनने को तीर्थ के साधु-संत पधारे। भजन गायक नंद किशोर शर्मा नंदू, दंडी स्वामी कन्हैयाश्रम, राजेंद्र आश्रम, चन्द्रेशाश्रम, महामंडलेश्वर गोपाल दास महाराज, मुख्य यजमान चेतन भाई, ट्रस्टी ओमदत्त देव, श्रीराम कथा समिति के जिनेंद्र गर्ग, प्रदीप जिंदल , अमित गोयल व सत्यप्रकाश रेशू मौजूद रहे।
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा में नृत्य करते श्रद्धालु। संवाद
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा में नृत्य करते श्रद्धालु। संवाद