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गन्ने की पौध से महिलाओं ने खोला खुशहाली का दरवाजा

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मन्सूरपुर में गन्ने की पौध तैयार करती समूह की महिलाएं। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। जिले के ग्रामीण अंचल की महिलाएं गन्ने की पौध से आर्थिक प्रगति की ओर कदम बढा रही है। गन्ना विभाग के सहयोग से 172 समूहों से 3632 महिलाएं जुड़ी है। इन महिलाओं ने गन्ने की पौध से एक वर्ष में 1,28, 82,950 रुपये की शुद्ध कमाई की है।
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प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी की गन्ने की पौध तैयार करने में महिलाओं के सहयोग की सोच ग्रामीण महिला उत्थान में कारगर साबित हो रही है। जिले में इस समय गन्ने की पौध तैयार करने में 172 स्वयं सहायता समूह लगे हैं। इन समूहों में 3632 महिलाएं जुड़ी हैं। वर्ष 2021-21 में इन महिला समूहों ने सिंगल बड के रूप में 78, 02,763 पौध तैयार की। बड चिप के रूप में 26,79,336 पौधे तैयार किए। जिले में कुल 10,48,210 पौधे तैयार हुए। एक से डेढ़ माह में पौध तैयार हो जाती है। इसके बाद इन पौधों को गन्ना विभाग और चीनी मिलों के माध्यम से किसानों को बेच दिया जाता है। पौध पर होने वाले खर्च का आधा पैसा गन्ना विभाग अनुदान के रूप में देता है। आधा पैसा पौध खरीदने वाले किसान से लिया जाता है। जिले के महिला समूहों ने इस सत्र में एक 1,28, 82, 950 की शुद्ध आय की है। जिले में पहली बार किसी योजना से इतनी महिलाएं एक साथ जुड़ी है और सीधे लाभ कमाया है।
316 हेक्टेयर में लगी पौध
महिला समूहों ने गन्ने की जो पौध तैयार की है वह जनपद के किसानों ने 316 हेक्टेयर में लगाई है। ऐसे हालात में अगर 0238 प्रजाति पूरी तरह बीमारी की चपेट में आ जाती है तो भी गन्ने की फसल प्रभावित नहीं होगी। नई प्रजातियों का बीच किसान को अच्छी मात्रा में उपलब्ध हो जाएगा।
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एक पौधे पर आता है 2.60 रुपये का खर्च
गन्ने की पौध तैयार करने में महिला समूह का एक सिंगल बड पर दो रुपये 60 पैसे का खर्च आता है। इस खर्च में एक रुपया 30 पैसा गन्ना विभाग और एक रुपया 30 पैसा पौधे की खरीद करने वाला किसान देता है। इसी तरह एक बड चिप पर महिला समूह का औषत खर्च तीन रुपये 40 पैसे है। एक रुपया 70 पैसा गन्ना विभाग अनुदान और एक रुपया 70 पैसा खरीदारी करने वाला किसान देता है।
किसान के लिए अधिक हितकारी है तैयार पौध
जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि गन्ने की पौध किसान के लिए अधिक हितकारी है। हमारे जिले में गेहूं काटकर किसान गन्ना लगाता है तो उसे डेढ माह की तैयार पौध मिल जाती है। दूसरे यह पौध शोधित होती है बीमारी फैलने का कोई खतरा नहीं है। प्रदेश में जिस तरह 0238 बीमारी की चपेट में आ रहा है, ऐसी परिस्थित में गन्ने की नई प्रजातियों से तैयार यह पौध गन्ने की फसल को बचाने में बड़ी सहायक सिद्ध हो रही है।
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