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खादर में फैला शिकारियों का जाल, बेपरवाह अफसर

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वन्य जीवों के तस्करों से जुड़े हो सकते हैं शिकारियों के तार
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मुजफ्फरनगर। गंगा एवं सोलानी नदी के खादर क्षेत्र में शिकारियों का जाल फैला है। जंगली जानवरों का शिकार करने वाले ये शिकारी उनके अवशेषों की तस्करी करने वालों से जुड़े हो सकते हैं। भोकरहेड़ी क्षेत्र में लगाए गए खटके में गुलदार के फंसने की घटना के बाद वन विभाग ने शिकारियों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
भोकरहेड़ी के जंगल में जिस तरह शिकारियों ने खटका लगाया, उसे देखकर लगता है कि ये पेशेवर शिकारी हैं और अक्सर क्षेत्र में खटका लगाकर शिकार करते हैं। बताया जाता है कि ये लोग जानवर के खटके में फंसने के बाद उसे पीट-पीटकर मार देते हैं, ताकि उसका चमड़ा आसानी से उतर जाए। क्षेत्र में सक्रिय शिकारियों के तार बड़े तस्करों से भी जुड़े होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। गंगा का खादर क्षेत्र हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य के तहत आता है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजाति के जंगली जानवर रहते हैं। इनमें हिरण, बारहसिंघा, चीतल, गुलदार, नील गाय आदि प्रमुख हैं। इसलिए शिकारियों की सक्रियता भी इस ज्यादा है। उधर, डीएफओ सूरज का कहना है कि जानकारी करने पर पता लगा है कि कुछ लोग फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों को पकड़ने के लिए खटका लगाते हैं। भोकरहेड़ी में लगाए गए खटके में गुलदार फंस गया। गुलदार को फंसा देख यह लोग डर गए होंगे और इसलिए खटका नहीं हटा पाए होंगे। उन्होंने बताया कि शिकारियों की पूरी छानबीन की जा रही है। पूरे क्षेत्र में टीमों को सक्रिय कर दिया गया है।
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एक बार फंसा तो छूट नहीं पाता जानवर
मुजफ्फरनगर। खटका लोहे का बना एक शिकंजा होता है। यह एक लोहे की रॉड से जंजीर से जुड़ा होता है। शिकारी इस रॉड को जमीन में गहराई तक ठोक देते हैं और इससे जुड़े शिकंजे को घास-फूंस में छिपा देते हैं। जैसी ही जानवर का पैर इस शिकंजे पर पड़ता है वह उसे जकड़ लेता है। शिकंजे की पकड़ इतनी मजबूत होती है कि बड़ा जानवर भी इससे छूट नहीं पाता। खटके का दबाव जानवर के पैर की हड्डी तक को नुकसान पहुंचा देता है।
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खादर में बिखरे मिले थे जंगली जानवरों के अवशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। खादर क्षेत्र में भूमाफिया एवं शिकारियों का बोलबाला है। भूमि पर अवैध कब्जा करने के साथ यहां रात के अंधेरे में वन्य जीवों का शिकार किया जाता है। बीते 20 नवंबर को गोचर की भूमि पर कब्जा करने के मामले में मौके पर पहुंचे मुजफ्फरनगर और बिजनौर जिले के वन एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की थी। उस दौरान इस क्षेत्र में बारहसिंहा व अन्य जानवरों के अवशेष जगह-जगह बिखरे मिले थे। क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि रात के अंधेरे में गंगापार से वाहनों पर लगी बड़ी-बड़ी लाईटों की तेज रोशनी में वन्य जीवों का शिकार किया जाता है। शिकारी वन्य जीवों को दौड़ाकर गोली मारते हैं तथा उनके अवशेषों की तस्करी करते हैं।
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