आबकारी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने का धंधा तेजी से फल फूल रहा है। खादर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने की भट्ठियां लगातार धधक रही हैं। कई ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है। हर साल कच्ची शराब पीने से कई लोगों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ता है। पुरकाजी कस्बे सहित देहात के गांव हरिनगर, झबरपुर, बढ़िवाला, नूरनगर, कल्लनपुर, खेड़की, माडला, खाईखेड़ी, तुग़लकपुर, कमहेड़ा आदि में अवैध शराब का धंधा पिछले करीब 20 वर्षों से चरम सीमा पर है।
मौजूदा समय में यह धंधा एक उद्योग का रूप ले चुका है। हाल यह है कि इस धंधे में पुरुषों के अलावा महिलाएं व युवा भी लिप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। खादर के कई गांवों में अवैध शराब की दर्जनों भट्ठियां पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम चल रही हैं, जिनमें बनाई जाने वाली अवैध शराब को माफिया थाना क्षेत्र के कई गांवों सहित उत्तराखंड तक सप्लाई करते हैं।
जब कभी शासन-प्रशासन का दबाव पड़ता है तो थाना पुलिस छोटे-छोटे शराब माफिया को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है, जबकि बड़े माफिया पुलिस पकड़ से दूर ही रहते हैं। उधर, एसएसआई वीरेंद्र सिंह का कहना है कि दर्जनों लोगों को अवैध शराब के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। लगातार अभियान चलाकर शराब माफिया की धरपकड़ की जा रही है। इस धंधे पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जाएगा।
इस तरह बनाई जाती है शराब
पुरकाजी। ग्रामीणों से जानकारी मिली है कि शराब माफिया जंगलों में गड्ढे खोदकर उसमें ड्रम दबाए रहते हैं। उनमें पानी डालकर शीरा व यूरिया के अलावा सड़े गले हुए फल व सब्जियां आदि डालकर उन्हें कई कई दिनों लाहन तैयार किया जाता है। जब ड्रमों में सभी सामान पूरी तरह सड़ जाता है तब शराब तैयार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस शराब में अल्कोहल का कोई मानक नहीं होता। यह शराब बेहद खतरनाक होती है। इसका अधिक सेवन जान भी ले सकता है।
आबकारी अफसरों ने माना, शराब में था जहर
मुजफ्फरनगर। मीरापुर के मोहल्ला खटिकान में शराब पीने से दो लोगों की मौत के बाद आबकारी महकमे में भी हड़कंप मचा है। जांच पड़ताल के बाद विभागीय अफसरों ने भी माना है कि जो शराब आदेश और कृष्ण ने पी थी, उसमें जहर था। कृष्ण का उपचार करने वाले चिकित्सक ने भी इसकी पुष्टि की है। अफसरों का दावा है कि शराब मोहल्ले के ही टिल्लू और गुल्लू से खरीदी गई थी।
जिला आबकारी अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम अजय शंकर पांडेय को भेजी है। आबकारी अधिकारी का कहना है कि आदेश और कृष्ण ने मोहल्ले के ही टिल्लू और गुल्लू से लेकर शनिवार दोपहर में शराब पी थी। इससे पता लगता है कि वह शराब पीने का आदी था। उन्होंने बताया कि आदेश की मृत्यु शनिवार रात्रि आठ बजे हो गई थी, जबकि कृष्ण को जसवंत राय हॉस्पिटल मेरठ में भर्ती कराया गया था। क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक जय कमल कुलश्रेष्ठ को डॉक्टर ने मेडिकल रिपोर्ट दिया कि कृष्ण ने जहरीला पदार्थ पिया है।
डीएम को भेजी रिपोर्ट में बताया कि प्रथम दृष्टया अत्यधिक शराब पीने अथवा शराब में कोई जहरीला पदार्थ मिलाने का प्रतीत होता है। उधर, सहारनपुर मंडल के आबकारी उपायुक्त राकेश चतुर्वेदी भी मीरापुर कस्बे में पहुंचे। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद आशंका जताई कि शराब पीते समय किसी व्यक्ति ने साजिश कर जहरीला पदार्थ शराब में मिला दिया हो, जिसे पीने से दोनों व्यक्तियों की मौत हो गई।
घटना को लेकर एलआईयू की टीम भी सक्रिय रही। पुलिस ने मृतक आदेश के भाई राकेश की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रात में दबिश दी, लेकिन आरोपी फरार मिले। सीओ जानसठ सोमेंद्र नेगी ने बताया कि इस संबंध में चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
विसरा प्रिजर्व किया
मुजफ्फरनगर। एसपी देहात आलोक शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतकों का विसरा प्रिजर्व किया गया है, जिन्हें जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा भेजा जाएगा। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से पता चलेगा कि शराब कैसी थी।