उत्तराखंड राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष एके सिकंदर पंवार ने कहा कि सफाई कर्मचारी के पद पर केवल वाल्मीकि समाज के युवकों को ही नौकरी मिलनी चाहिए। यूपी में दूसरी जातियों के लोगों की भर्ती कर वाल्मीकि समाज का हक छीना जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले पर पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि सिर पर मैला ढोने और गंदी नालियों को साफ करने का काम वाल्मीकि समाज के लोगों ने किया। अब सरकारी नौकरी लगने का नंबर आया तो हर कोई दावा जताने लगा है।
इसे किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड में सफाई कर्मी के पद पर अब केवल वाल्मीकि समाज के लोगों को ही नौकरी दी जा रही है। उत्तराखंड में भी पंचायती राज विभाग द्वारा प्रत्येक गांव में सफाईकर्मी की नियुक्ति कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर नदियों में कूड़ा डलने से प्राकृतिक आपदा आती हैं। कूड़े से पानी का बहाव रुक जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा प्रमुख मायावती ने सफाई कर्मी के पद पर अन्य जातियों को नौकरी देकर उनके समाज को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। फिरोजाबाद में वाल्मीकि समाज के युवकों को घोड़ी पर नहीं बैठने देने की घटना पर रोष जताया।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में सफाईकर्मी का नाम पर्यावरण मित्र रखा गया है। उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेशय यादव को भी यही नाम कर देना चाहिए। उत्तराखंड की तरह यूपी में भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर यूनिवर्सिटी की स्थापना की जानी चाहिए।