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यूपी: मुजफ्फरनगर जेल में छापेमारी से मची अफरा-तफरी, कट्टन, ब्लेड और नशीले पदार्थ बरामद

Sun, 19 Aug 2018 07:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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चैकिंग के बाद जेल से बाहर आते डीएम व एसएसपी - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के मुजफ्फरनगर जिला कारागार में पुलिस-प्रशासन ने रविवार सुबह अचानक छापेमारी करते हुए बैरकों की तलाशी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में चम्मचें घिसकर बनाई गई कट्टन, ब्लेड और नशीले पदार्थ बरामद किए। दो दिन पूर्व जेल प्रशासन द्वारा ली गई तलाशी के दौरान बंदी के पास से एंड्रॉयड फोन मिलने के बाद अफसरों ने छापेमारी की। पुलिस प्रशासन की छापेमारी से जेल में अफरातफरी का आलम हो गया।
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डीएम राजीव शर्मा व एसएसपी अनंत देव ने रविवार सुबह शहर के तीनों थानों की फोर्स के साथ जिला कारागार में छापेमारी की। भारी फोर्स के साथ पहुंचे अफसरों ने सीधे अंदर जाकर जेल की सभी बैरकों को घेरे में लेते हुए एक-एक कर सभी बैरकों की तलाशी ली। इस दौरान जेल में बंद शातिर अपराधियों की बैरकों में विशेष रूप से तलाशी अभियान चलाया गया। सूत्रों के मुताबिक तलाशी लेने पर जेल अफसरों को जेल की बैरकों से बड़ी संख्या में कट्टन, ब्लेड के साथ ही डोडा पाउडर व नशे की गोलियां बरामद हुईं हैं।

इस पर अफसरों ने बैरकों से बरामद किया गया सभी सामान कब्जे में लेते  हुए जेल प्रशासन को जेल में पैनी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मामले में जेल अफसरों का कहना है कि जेल की बैरकों से कुछ आपत्तिजनक सामान मिला है, जिसके संबंध में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में एसएसपी अनंतदेव का कहना है कि दो दिन पूर्व जेल में बंदी के पास से एंड्रॉयड मोबाइल मिलने के बाद उक्त छापेमारी की गई है। इसमें काफी आपत्तिजनक सामान मिला है, जिस संबंध में जेल प्रशासन को जरूरी ताकीद की जा रही है। 
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जेल से पहले भी मिलता रहा है आपत्तिजनक सामान 

जेल के बाहर तैनात फोर्स - फोटो : अमर उजाला
जेल में कट्टन, ब्लेड व नशीले पदार्थ बरामद होने का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार यहां तलाशी के दौरान इसी तरह के आपत्तिजनक सामान बरामद होते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में जेल के अंदरूनी तत्व कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में अपराधियों के संपर्क में रहते हैं, जो आपत्तिजनक सामान उन तक पहुंचाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर मदद करते हैं। ऐसे में जेल प्रशासन के लिए इन तत्वों पर नकेल कसना सबसे अधिक जरूरी है। 

जेल प्रशासन कठोर कार्रवाई करने में नाकाम
जिला कारागार में डेढ़ साल पहले छापेमारी में करीब 18 मोबाइल फोन बंदियों और कैदियों से मिले थे। छह माह पहले जेल से बंदी द्वारा बैरक में सेल्फी  लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने का मामला चर्चा का विषय बना था, जिसमें शासन ने भी अधिकारियों तलब किया था। कारागार के बंदी पूर्व में भी धड़ल्ले से मोबाइल पर बाहरी तत्वों से लगातार संपर्क में रहते हुए अपने गिरोह का संचालन करते रहे हैं।

जेल में बंदीरक्षक चुन्नीलाल हत्याकांड, धौलापुल का चर्चित हमला कांड जेल से मोबाइल संचालन का ही नतीजा माने जाते रहे हैं, जिनमें जेल के सीखचों के पीछे से ही अपराधी बाहरी गुर्गों के टच में रहकर उनसे वारदातों को अंजाम दिलाते रहे। आपराधिक तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से जेल में करोड़ों की लागत से जैमर लगा दिए गए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहने से भी आगे निकल गया।

पहले अपराधी फीचर फोन का इस्तेमाल करते थे अब जैमर का तोड़ निकालते हुए इन शातिरों ने एंड्रॉयड मोबाइल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। दो दिन पूर्व बंदी से मिला एंड्रॉयड मोबाइल ही इस घालमेल की पूरी कहानी स्पष्ट कर रहा है, लेकिन जेल प्रशासन इस संबंध में पुख्ता कदम उठाने में नाकाम ही रहा है। 


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