ग्रामीणों का कहना है कि भगवान शिव शंकर सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करते हैं। यहां के प्राचीन शिव मंदिर को महाभारतकालीन कहा जाता है। खरड़ गांव की प्रधान पूनम मलिक व उनके पति विकास मलिक ने बताया कि करीब 800 बीघा में फैले हुए वन क्षेत्र में शिव मंदिर और कदंब के वृक्ष भी स्थित हैं।
पांड़वों ने बिताया था अज्ञातवास
ग्राम प्रधान पूनम मलिक कहती हैं कि बरनावा में लाक्षागृह से बचने के बाद अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आकर रुके थे। भगवान शिव की आराधना के लिए पांडवों ने मंदिर का निर्माण कर पंचमुखी शिवलिंग स्थापित किया था। पांडवों से मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और विदुर के दूत यहां आए थे। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के कदम वहां पड़ने से ही कदंब के वृक्ष उग आए।