दिल्ली-वाया मेरठ-सहारनपुर मंडल के रेल पथ की मरम्मत का कमर कस ली है। रेल पथ के इंजीनियरों ने ट्रैक की रेग्युलर चेकिंग का शेड्यूल बनाया है। सर्दी के असर के कारण ट्रैक सिकुुड़ रहा है। ऊपर से रेल पथ पर ट्रेनों का दबाव भी अधिक है। ऐसे में इस ट्रैक की देखभाल को विभागीय स्तर पर भी चहल-कदमी बढ़ा दी गई है।
खतौली और मंसूरपुर के बीच पिछले एक सप्ताह में दो बार रेलवे ट्रैक क्रैक हो चुका है। इससे रेलवे विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ी। दोनों बार ही क्रैक हुए ट्रैक से दर्जनभर गाड़ियां गुजरी है। चूंकि कानपुर रेल हादसे के बाद विभाग सतर्कता बरत रहा है। ट्रैक क्रैक होने की खबर से यात्रियों में भी भय बन गया है। रात का तापमान कम होने का असर ट्रैक पर भी पड़ रहा है। क्योंकि सर्दी के असर से ट्रैक सिकुड़ रहा है। जो दिन में तापमान बढऩे पर फैलता है। ऐसे में ट्रैक पर जहां-जहां ज्वाइंट रूप से पटरियां मिली हुई है, वहां से यह लूज पडऩे के साथ क्रैक हो रही है। रेल पथ की मरम्मत को सीनियर सेक्शन रेल पथ के इंजीनियरों ने कमर कस ली है। 24 घंटे ट्रैक पर निगाह रखने के साथ पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
30 अप में 31 डाउन में रेलगाड़ी
दिल्ली से वाया मेरठ, सहानपुर मंडल का रेलवे पथ व्यस्ततम मार्ग में एक है। इस रेल मार्ग पर 30 गाडिय़ा अप में यानि अमृतसर, अंबाला, जम्मू, देहरादून आदि क्षेत्रों से है। जबकि 31 गाड़ियां डाउन में दिल्ली, बांद्रा, मुंबई, कानपुर, इलाहाबाद आदि जगहों से है। कुल दोनों से ओर से 61 ट्रेनें हैं। जिनमें पैसेंजर भी शामिल है। सर्दी में सिकुड़े ट्रैक से ट्रेने लगातार गुजरती है। जिससे ट्रैक गर्म होकर फैलता है। यह भी नट-बोल्ट के लूज होने का एक कारण है।
दिल्ली से वाया मेरठ, सहारनपुर रेलवे ट्रैक पर ट्रेनें भी काफी है। 24 घंटे में करीब 60 गाड़ियों अप-डाउन से गुजरती है। ट्रैक कहीं से भी क्रैक नहीं है।
विपिन कुमार त्यागी, स्टेशन अधीक्षक, मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन
रेल पथ पर पेट्रोलिंग के साथ मरम्मत का कार्य तेज किया जा रहा है। सर्दी के मौसम में ट्रैक पर थोड़ी समस्या बनती है, लेकिन यह मामूली होता है। कोई खतरे वाली बात नहीं है।
इंद्रजीत सिंह, सीनियर इंजीनियर, रेलवे पथ मुजफ्फरनगर