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समय पर मिला भुगतान, गन्ने का रकबा बढ़ाने लगे किसान

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मुजफ्फरनगर में गन्ने की फसल - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- जिले की जिन चीनी मिलों ने बेहतर भुगतान किया, उन क्षेत्रों में बढ़ा गन्ना
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- जिले में कुल 3828 हेक्टेयर गन्ने का क्षेत्रफल इस बार बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। भुगतान की स्थिति में सुधार के साथ ही जिले में गन्ने का रकबा फिर से बढ़ने लगा है। गन्ना विभाग का सर्वे पूरा हो चुका है, पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष इस बार खेतों में 3828 हेक्टेयर गन्ना अधिक खड़ा है। गन्ना विभाग के सर्वे में यह भी सामने आया है कि जिन चीनी मिलों ने पिछले कुछ सालों में समय पर भुगतान किया है, उनके क्षेत्र के किसान गन्ने में और अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि मोरना को छोडकऱ अधिकतर मिलों में गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ा है। जिले के किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 13 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। अब तक खतौली, मंसूरपुर, खाईखेड़ी, टिकौला और रोहाना चीनी मिल किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। खतौली और तितावी मिल क्षेत्र मेें पिछले सत्र के सापेक्ष इस बार तीन-तीन फीसदी गन्ना बढ़ गया है। रोहाना चीनी मिल क्षेत्र में 10 फीसदी और मंसूरपुर मिल क्षेत्र में सात फीसदी गन्ना क्षेत्रफल पिछले सत्र के सापेक्ष बढ़ा है।
चीनी मिलों में यह है गन्ना क्षेत्रफल की स्थिति
चीनी मिल 2021-22 2022-23
खतौली 30829 31752
तितावी 16505 17041
मंसूरपुर 25908 27799
रोहाना 7529 8280
मोरना 15843 15460
टिकौला 22861 24559
भैसाना 18904 19397
भुगतान में पिछड़ रही यह चीनी मिलें
जिले की तितावी चीनी ने अभी तक शत प्रतिशत भुगतान नहीं किया है। हालांकि सोमवार तक भुगतान का प्रतिशत 85 के पास पहुंच जाने की उम्मीद है। मोरना और भैसाना चीनी मिल पिछड़ रही है।
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इन मिलों को भी करते हैं गन्ना सप्लाई
जिले के किसान खाईखेड़ी, देवबंद, थानाभवन, दौराला, मवाना, गांगनौली मिल को भी गन्ना सप्लाई करते हैं।
इस तरह बढ़ता जा रहा है गन्ना
मुजफ्फरनगर। जिले के किसानों में गन्ने की खेती का जादू सिर चढकर बोल रहा है। जनपद में गन्ने का क्षेत्रफल लगातार बढता जा रहा है। इस बार भी 3828 हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ गया है। लगभग 85 प्रतिशत जमीन पर यहां गन्ने की खेती हो रही है। जनपद में दो लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। जिले के किसान गन्ने की खेती को ही प्राथमिकता देते है। अन्य फसलों का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। गन्ने की खेती बढकर यहां 2022-23 में एक लाख 71 हजार 843 हेक्टेयर में पहुंच गई है। पिछले साल जिले में एक लाख 68 हजार 15 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई थी। जिले में 2018-19 में गन्ने का क्षेत्रफल एक लाख 39 हजार 221 हेक्टेयर था। 2019-20 में ये एक लाख 47 हजार 29 हेक्टेयर हो गया। 2020-21 में यह एक लाख 64 हजार 391 हेक्टेयर पर पहुंच गया। जिले में मात्र सात हजार हेक्टेयर जमीन पर बाग हैं।
वर्ष क्षेत्रफल
2018-19: 139221 हेक्टेयर
2019-20: 147029 हेक्टेयर
2020-21: 164391 हेक्टेयर
2021-22: 168015 हेक्टेयर
2022-23: 171843 हेक्टेयर
लाभ की फसल, इसलिए बढ़ा गन्ना
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि जिले के किसान गन्ने की खेती को सबसे सुरक्षित मानते है। दूसरी फसलों पर प्राकृतिक आपदा का अधिक असर होता है। गन्ने पर बारिश, सूखे, बाढ़ का अधिक असर नहीं होता। गन्ने के दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। कुल मिलाकर गन्ने की ख्ेाती लाभ का सौदा साबित हो रही है।
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भूसा कम, इस बार चारे का रहेगा संकट
गेहूं की फसल पर मौसम की मार के कारण इस बार भूसे का संकट रहा। गन्ने का रकबा बढ़ा है। आशंका यह भी है कि इस बार चारे में प्रयोग की जाने वाली ज्वार के दाम में पशुपालकों को अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।
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