खतौली में कालेज के सफाईकर्मी की सजगता से ट्रेनों में सफर करने वाले मुसाफिरों की जान बच गई। वृद्ध कर्मी हांफता हुआ ट्रेन रुकवाने को हाथ में लाल कपड़ा लेकर इंजन की ओर दौड़ पड़ा। उसके हाथ में लाल कपड़ा देखकर ट्रेन का ड्राइवर भी खतरा भांप गया था। ड्राइवर ने भी इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन के पहिए जाम कर दिए थे।
तिलकराम इंटर काॅलेज का 60 वर्षीय सफाईकर्मी राधेश्याम परिवार के साथ कालेज में ही रहता है। रविवार सुबह छह बजे के करीब राधेश्याम दूध लेने के लिए कालेज से निकला था। बताया कि वह रेलवे ट्रैक पार करने लगा तो, उसकी एकदम नजर टूटे पर ट्रैक पर पड़ी। टूटे ट्रैक को देखकर वह दूध लाना भी भूल गया था। उसने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी और कालेज से ट्रेनों को रोकने के लिए लाल कपड़ा उठाकर लाया।
इसी दौरान उसको काफी दूर मुजफ्फरनगर की ओर से एक ट्रेन आते हुए दिखाई दी। वह लाल कपड़ा हाथों में लहराता हुए ट्रेन के इंजन की ओर ट्रेन रोको, ट्रेन रोको चिल्लाता हुआ दौड़ पड़ा। उसने भागते समय रेलवे लाइन पर पत्थरों पर गिरने तक की परवाह नहीं की और दौड़ता चला गया। वृद्ध के हाथों में लाल कपड़ा देखकर ट्रेन के ड्राइवर को खतरा का अहसास हो गया और उसने भी इमरजेंसी ब्रेक लगाने शुरू कर दिए। ट्रेन के पहिए थमते ही कर्मी ड्राइवर के पास पहुंचा और उसने ट्रैक के टूटने की जानकारी दी।
इसके बाद ड्राइवर ने रेलवे अधिकारियों को जानकारी दी थी। ट्रेन की बोगियों में सफर करने वाले यात्रियों को ट्रैक टूटने का पता चला तो, उनमें अफरातफरी मच गई थी। इस तरह से सफाईकर्मी की सजगता से ट्रेन में सफर करने वाले हजारों मुसाफिरों की जान बची।
रेलवे ट्रैक पहले भी हो चुकी क्रेक
मंसूरपुर से लेकर सकौली रेलवे स्टेशन के बीच पिछले कई सालों में कई बार रेलवे ट्रैक क्रेक हुई। रात में ट्रैक क्रेक हो जाने पर पेट्रोलिंग कर्मचारियों को इसकी खबर तक नहीं लगती है। रेलवे ट्रैक के नट और बोल्ट खुलकर गिरना रेलवे विभाग कर्मचारी इसको हल्केपन में लेते हैं। पिछले वर्ष 2 दिसंबर की रात को तहसील के सामने रेलवे ट्रैक क्रेक हो गया था।
सुबह के समय पेट्रोलिंग करते हुए कर्मचारी पहुंचे तो, ट्रैक के टूटे होने का पता चला था। उस वक्त भी रातभर एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ी समेत दर्जनों ट्रेन टूटे ट्रैक से गुजरी थी। रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच जाने पर आनन फानन में करीब 15 फुट लंबा रेलवे ट्रैक का टुकड़ा बदलवाया गया। इस दौरान भी कई ट्रेन प्रभावित हुई थी। इस तरीके से रात के समय टूटे ट्रैक से ट्रेनों का गुजरना हादसा होने का खतरा बना रहता है।