केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से मिलने पहुंचे पीजेट वेलफेयर के चेयरमैन अशोक बालियान
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ऑस्ट्रेलिया से डेयरी उत्पादों के समझौते पर भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और केंद्रीय पशुपालन मंत्री डॉ. संजीव बालियान के बीच ट्विटर वार पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। दोनों ने इस विषय में ट्वीट नहीं किए। कभी चौधरी राकेश टिकैत के करीबियों में शामिल रहे पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान अब मैदान में कूद गए हैं। अशोक ने कहा कि 2019 में ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से डेयरी प्रोडक्ट के आयात वाले समझौते से केंद्र सरकार अलग हो गई थी।
अशोक बालियान ने गुरुवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान से इस विषय पर बात की है। डॉ. संजीव बालियान ने इस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते से अलग होने की घोषणा कर दी थी। क्योंकि टैरिफ नियम भारत के अनुकूल नहीं थे।
वर्ष 2020 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते पर चीन समेत 15 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत सभी सदस्य देशों के लिए टैरिफ कटौती पर एक जैसे ही मूल नियम होंगे। भारत इस मुक्त व्यापार समझौते में शामिल नहीं हुआ था।
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इन मुद्दों पर ऑस्ट्रेलिया से चल रही बात
उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय द्वारा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंतरिम मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत चल रही है। इस समझौते में उत्पादों, सेवाओं, निवेश, मूल देश के नियम, सीमा शुल्क सुविधा, कानूनी और संस्थागत मामलों पर स्पष्ट रणनीति बनाई जाएगी। ऑस्ट्रेलिया के साथ अंतरिम समझौते में कपड़ा, फार्मा, जूते, चमड़े के उत्पाद और कृषि उत्पाद के बड़े क्षेत्र शामिल होंगे। समझौता पूरा होने के बाद अगले पांच साल में उत्पादों का द्विपक्षीय कारोबार 100 अरब डॉलर और सेवाओं का 15 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। भारत डेयरी उत्पादों के टैरिफ प्रोफाइल पर उच्च आयात टैरिफ लगा कर अपने पशु पालकों को सुरक्षा प्रदान करता है।
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