तीन तलाक बिल पर मुस्लिम समाज का विरोध मुखर हो गया है। रविवार को तीन तलाक पर महासभा का आयोजन किया गया। उलमा, इमाम और मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक बिल को काला कानून करार दिया है। इसे सिरे खारिज कर नामंजूर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश-प्रदेश में इस्लाम और मदरसों को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
फलाह-ए-इंसानियत वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान पर ख्वातीन ताहफुज-ए-शरीयत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। मुस्लिम महिलाओं के साथ उलमा, इमाम ने भाग लिया। उलमा ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द व एकता के लिए खतरा है।
तीन तलाक पर कोई कानून बनाया जाना शरीयत के खिलाफ है। तीन तलाक का मामला दीन और हदीस की रोशनी पर आधारित है। कहा कि मोदी सरकार बिल को महिलाओं के हित में बता रही है, लेकिन यह कानून पूरी तरह महिला विरोधी है। यह कानून धार्मिक आजादी व शरीयत में दखलंदाजी है।
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं के हितों की इतनी ही चिंता है तो केंद्र सरकार को चाहिए कि वह अल्पसंख्यकों के लिए देश भर में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करे। मुस्लिम महिलाओं ने भी मंच से तीन तलाक कानून का विरोध किया और इसे काला कानून बताया।
संगठन के साथ मिलकर इसका विरोध किया जाएगा। महिलाएं बोलीं कि इस्लाम तथा मदरसों को साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है। तीन तलाक के बिल को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। सभा में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान की कड़ी निंदा की गई।
सभा में कारी खालिद कासमी, मुफ्ती जुल्फिकार, शमशाद कुरैशी, हकीम रब्बानी, शाहिद अंसारी, अमीर आलम, मौलाना राशिद, मौलाना इंतजार, मौलाना हुजैफा, मौलाना जमशेद, मौलाना मसीह उल्लाह, मौलाना आदिल, मौलाना सालिम, कारी शौकत, मोहम्मद मतलूब, सरफराज हुसैन, शाहनवाज., वसीम राजपूत, डॉ नूर हसन सलमानी, शुजाअत राणा, डा. इसरार, मास्टर अल्ताफ, काजी शाहवेज एड., साजिद हसन आदि मौजूद रहे।