देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता है। जब तक धर्म त्यागने वाला व्यक्ति दिल से कलमा नहीं पढ़ लेता है, तब तक वह इस्लाम धर्म में शामिल नहीं हो सकेगा।
बृहस्पतिवार को मौलाना अरशद मदनी ने जारी बयान में कहा कि विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कुछ लोगों ने आपसी भाईचारा और सौहार्द को नुकसान पहुंचाने के लिए धर्मांतरण का सहारा ले लिया है, जबकि इस्लाम मजहब में ऐसा कोई नियम नहीं है, इसमें किसी भी गैर मुस्लिम को जबरदस्ती इस्लाम मजहब (धर्म) में शामिल कर लिया जाए। मौलाना मदनी ने कहा आश्चर्य होता है कि पढ़े लिखे लोग भी धर्मांतरण के बारे में सब कुछ जानते हुए भी अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक मानसिकता रखने वाले लोगों को देश के मुसलमानों से तो शिकायत है, लेकिन मुस्लिम देशों से उन्हें कोई शिकायत नहीं। जबकि मुस्लिम देशों में बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम रोजी-रोटी की तलाश में गए हुए हैं, लेकिन उन्हें किसी मुस्लिम देश ने जबरदस्ती मुस्लिम नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि देश के सांप्रदायिक और अज्ञानी लोग इस्लाम मजहब के खिलाफ धर्मांतरण का प्रोपेगंडा चला रहे हैं। उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे को जबरन इस्लाम मजहब को बदनाम करने वाला मुद्दा बताया है।