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दूर तक जाएगा पहले चरण का संदेश, फर्स्ट फेज का असर दूसरे चरणों पर भी दिखेगा

Thu, 05 Jan 2017 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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शहर में होर्डिंग उतारती प्रशासन की टीम। - फोटो : अमर उजाला
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चुनाव आयोग ने मतदान के लिए संवेदनशील जिलों को पहले चरण में रखा है। वेस्ट यूपी के 15 जिलों में प्रथम फेज में 11 फरवरी को मतदान होना है। यहीं से प्रदेश भर के चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ होगी। पहले चरण के चुनाव का संदेश दूर तक जाएगा, जिससे अगले चरणों में सियासी दलों को वोटों के ध्रुवीकरण में मदद मिलेगी।  
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सूबे में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। सियासी दलों का पारा अचानक बढ़ गया है। चुनाव आयोग द्वारा तिथियों का ऐलान करते ही सियासी दलों के हाईकमान सक्रिय हो गए हैं। चूंकि पहले चरण में 15 जिलों की 73 सीटों पर चुनाव होगा। पहले चरण में उन जिलों में चुनाव रखा गया है, जो चुनावी लिहाज से संवेदनशील श्रेणी में हैं। इनमें मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, हापुड़ आदि में मतदान होगा। मुजफ्फरनगर और शामली दंगाग्रस्त इलाके रहे हैं।

यहां लोकसभा चुनाव में भाजपा को एकतरफा वोट मिले थे। ऐसे में यह चुनाव भी सांप्रदायिक आधार पर लड़ा जाना तय माना जा रहा है। बसपा ने छह सीटों में से तीन पर मुसलिम प्रत्याशी उतारे हैं। सपा ने दो ही मुसलिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। पहले चरण का मतदान 11 फरवरी को होना है। यहां होने वाले पहले चरण का संदेश दूर तक जाएगा। इसके बाद अगले चरणों की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी। यहां के ध्रुवीकरण का असर अगले चरणों में साफ नजर आएगा। चार दिन बाद ही दूसरे चरण में 15 फरवरी को सहारनपुर, बिजनौर, बरेली, मुरादाबाद आदि 11 जिलों में चुनाव होगा। पहले राउंड में ही राजनीतिक दलों का दम और सूबे की सियासत का अंदाजा तय हो जाएगा।      
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कड़े इम्तिहान से गुजरेगा पुलिस प्रशासन       
चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा के लिए मतदान की तारीखों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष-2013 के दंगों के बाद वैसे तो कई चुनाव जनपद में शांतिपूर्ण हो चुके हैं, लेकिन विधानसभा के लिए होने वाले मतदान को लेकर पुलिस को कड़े इम्तिहान से गुजरना होगा।       

जनपद में 11 फरवरी को मतदान होना है। इसके लिए पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी है। बड़े स्तर पर शासन से पैरामिलिट्री फोर्स की मांग की गई है। एक कंपनी फोर्स ने शहर में आमद करा दी है। जिले में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इससे पूर्व 2014 में लोकसभा और 2015 पंचायत चुनाव हो चुके हैं। पंचायत चुनावों में कई जगहों पर बवाल हुए थे। बुढ़ाना के कुरथल में प्रधान पद के प्रत्याशी की हत्या कर दी गई थी।

ऐसे में पुलिस को कड़ी चौकसी बरतनी होगी। प्रभारी निरीक्षकों से लेकर एसपी और एसएपी तक सभी अधिकारियों को दो चार माह का कार्यकाल ही जनपद में है। पिछले चुनावों में जो पुलिस अधिकारी जनपद में थे, वो सभी कई वर्षों से जिले में तैनात थे। ऐसे में नए स्टाफ के लिए चुनाव कराना चुनौती से कम नहीं होगा। विभाग पूरी तरह से तैयारियों में जुटा है। बवाली गांवों का चिन्हित किया जा रहा है। एचएस की निगरानी, निरोधात्मक कार्रवाई, मिश्रित आबादी वाले मोहल्लों और गांवों की सूची, बवालियों और संदिग्धों पर नजर रखने जैसी तैयारियां पुलिस द्वारा की जा रही है।    
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