बिहागढ में प्रशासन द्वारा ध्वस्त किया गया निर्माण।
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पीर खुशहाल का पूरा महल ध्वस्त
मुजफ्फरनगर। बिहारगढ़ में वन विभाग की जमीन पर बना पीर खुशहाल का पूरा महल रविवार को ध्वस्त करा दिया गया। । इससे पहले परिसर में बनाए गए 50 कमरों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया था। लीज खत्म होने के 15 साल बाद एक बार फिर जमीन पर वन विभाग पूरी तरह काबिज हो गया है। उधर, खुशहाल का परिवार यहां से अपना सामान समेट कर बरेली रवाना हो गया है।
बिहारगढ़ में वर्ष 1975 में पीर खुशहाल ने 98 बीघा जमीन वन विभाग से लीज पर ली थी। 2005 में लीज का समय पूरा होने के बाद भी जमीन पर कब्जा बरकरार रहा। इस बीच इस जमीन पर अवैध रूप से पूरा महल बना दिया गया। यहां आने वाले चिल्लाह में ठहरने लिए 50 कमरे बनाए गए। वर्ष 2010 में पीर खुशहाल ने लीज बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे तत्कालीन डीएम ने खारिज कर दिया था। इसे लेकर पीर खुशहाल हाईकोर्ट इलाहाबाद गए। वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने भी डीएम की कार्रवाई को सही माना। वर्ष 2017 में पीर खुशहाल की मौत हो गई, लेकिन वन विभाग की जमीन कब्जा मुक्त नहीं हुई। हाल ही में वन विभाग ने पीर खुशहाल के परिजनों को दो नोटिस जारी किए थे। नोटिस के बाद भी जमीन खाली नहीं करने पर प्रशासन ने चिल्लागाह पर बनाए गए कमरों का ध्वस्तीकरण करना शुरू कर दिया। दस दिन की कार्रवाई में 50 कमरे पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। इसके बाद खुशहाल के परिजनों ने आवास खाली करना शुरू किया। यहां से इस परिवार ने बरेली कूच किया है। रविवार को आवासीय परिसर पूरी तरह खाली करा लिया गया। जमीन को वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया। एडीएम प्रशासन अमित सिंह और डीएफओ सूरज कुमार के नेतृत्व में दिन भर चले अभियान में जेसीबी और अन्य मशीनों से आवास भी ध्वस्त कर दिया गया। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि संपूर्ण जमीन खाली कराकर वन विभाग को सौंप दी गई है। यहां बनाए गए सभी आवास ध्वस्त करा दिए गए हैं।