रोडवेज में बिना वर्दी के चालक बस और कंडक्टर टिकट नहीं काटेंगे। परिवहन मुख्यालय ने डिपो को आदेश भेजकर वर्दी मुहैया कराने के लिए कहा है। अब चालक-परिचालक बस का स्टेयरिंग सिविल ड्रेस में नहीं थाम सकेंगे। साथ ही वर्कशॉप में भी कर्मचारियों की विशेष पहचान रहेगी। इसके लिए डिपो में अधिकारियों ने कवायद शुरू कर दी है।
रूट पर अक्सर बस में यात्रियों और कंडक्टर में पहचान कर पाना मुश्किल होता है। चालक को सीट पर दिखता है, लेकिन परिचालक बस में कई बार सिविल ड्रेस में होने के कारण पहचान से बाहर होता है। परिचालक की पहचान उसके हाथ में ईटीआईएम मशीन से होती है। अब बस में चढ़ते ही चालक और परिचालक की अलग पहचान दिखेगी।
दोनों को मुख्यालय ने वर्दी पहनकर कार्य करने के आदेश जारी किए हैं ताकि रोडवेज की भी विशेष पहचान बन सके। चालक जहां खाकी वर्दी पहनकर स्टेयरिंग पर बैठेगा, जबकि परिचालक सलेटी रंग की वर्दी पहनकर टिकट बनाएंगे। महिला कंडक्टर के लिए सलेटी रंग की सलवार-सूट रहेगी। साथ ही वर्कशॉप में कार्य करने वाले कर्मचारियों की भी दूर से ही पहचान होगी। यह भी खाकी वर्दी में नजर आएंगे।
आदेश आते ही डिपो में वर्दी दिए जाने को लेकर चालक-परिचालकों की तैयारी शुरू कर दी गई है। डिपो में 150 नियमित चालक-परिचालक बताए गए हैं। जबकि वर्कशॉप में 55 कर्मचारियों को पहले ही वर्दी दी गई है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि चालक-परिचालक वर्दी पहनकर ड्यूटी करेंगे। इसके लिए मुख्यालय से आदेश आए हैं। इस पर जल्द ही कार्रवाई शुरू होगी।
संविदा के लिए भी उठी मांग
मुजफ्फरनगर। डिपो में रोडवेज यूनियनों ने संविदा चालक-परिचालकों के लिए भी वर्दी दिए जाने की मांग उठाई गई है, ताकि इनकी भी अलग से पहचान रखी जा सके। डिपो में नियमित से अधिक संविदा पर चालक-परिचालक तैनात है।