संवाद समाचार एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बिना एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) के फर्राटा भर रहे वाहन स्वामियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 15 अप्रैल से ऐसे वाहनों की प्रदूषण जांच वाला प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिले में परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है।
हाल ही में परिवहन विभाग ने अपने पोर्टल में तकनीकी बदलाव किए हैं। इसके तहत 15 अप्रैल से पोर्टल वाहन का तभी प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करेगा जब वाहन का विवरण एचएसआरपी नंबर प्लेट के डेटाबेस से मेल खाएगा। बताया गया कि एल्युमीनियम से बनी एक विशेष नंबर प्लेट है। इस पर अशोक चक्र का होलोग्राम और 10 अंकों का लेजर कोड होता है।
इसमें वाहन के इंजन और चेसिस नंबर की कोडिंग होती है। वाहन चोरी होने की स्थिति में उसे इस नंबर प्लेट की मदद से खोजना आसान होता है। प्रदूषण जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए भी यह नियम कारगर है।
एआरटीओ अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि बिना सुरक्षित नंबर प्लेट के पकड़े जाने पर वाहन पर 5 हजार रुपये और वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने पर 10 हजार रुपये के दंड का प्रावधान है।
ऐसे बनती है एचएसआरपी नंबर प्लेट
वाहन मालिक को बुक एचएसआरपी की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद वाहन मालिक को फीस जमा करनी होती है। इसके बाद डीलर का नाम वाहन मालिक को दिया जाता है। वाहन मालिक को डीलर के पास जाना होता है। वहां नंबर प्लेट मिल जाती है। दोपहिया वाहन की साढ़े सौ रुपये, चौपहिया वाहन की साढ़े छह सौ, बस व ट्रक के लिए बारह सौ रुपये तक खर्च आता है।