बिना मास्क के विद्यार्थियों को क्लास में बैठने की अनुमति नहीं
चरथावल। कोरोना महामारी में घरों से ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। शासन की नई गाइड लाइन के मिलने के बाद करीब सात महीने बाद स्कूल-कॉलेजों में जाने का रास्ता साफ हुआ है। कक्षा नौ से 12 तक के 50 फीसदी विद्यार्थियों को अलग-अलग दिन स्कूल आने के लिए अभिभावकों की राय ली जा रही है। हालांकि बड़े बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजने में अभिभावक राजी नजर आ रहे हैं। स्कूलों में बिना मास्क के बच्चों को कक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।
जनता इंटर कॉलेज कुटेसरा के प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने बताया कि शासन की गाइड लाइन के बाद उन्होंने व्हाट्सएप के जरिये अभिभावकों की राय जुटानी शुरू की है। अभिभावकों को अनुमति पत्र भेजवा दिए हैं। कक्षा नौ से 12 तक करीब 275 बच्चों को 70 फीसदी ऑनलाइन कोर्स पूरा हो गया है। पौने तीन घंटे दो शिफ्टों में कक्षाएं चलेंगी। 50 प्रतिशत बच्चें एक दिन आएंगे और बाकी अगले दिन।
गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. मनोज गुप्ता ने बताया कि 19 अक्तूबर से विद्यार्थियों के लिए पूरे स्कूल को सैनिटाइज कराया जा रहा है। उनका मानना है कि मोबाइल नेटवर्किंग की दिक्कतों के कारण छात्र-छात्राएं रू-ब-रू पढ़ाई बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
महर्षि दयानंद इंटर कॉलेज दूधली के प्रधानाचार्य सुभाष सिंह बताते हैं कि उनके विद्यालय में अध्ययनरत 9-10 और 11-12 के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की अनुमति के बाद ही बच्चों को बुलाया जाएगा। अनुमति पत्र भरवाने का कार्य चल रहा है। 19 तारीख से पहले स्कूल खुलने के बाद स्थिति साफ होगी।
नालंदा पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल संजय सिंह ने बताया कि 50-50 फीसदी विद्यार्थियों को बुलाने के लिए नोटिस भेजा है। 200 विद्यार्थियों में से 33 की मंजूरी मंगलवार को अभिभावकों ने भेजी है। शासन की गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। बिना मास्क के विद्यार्थियों को क्लास में नहीं बैठाया जाएगा।
बिरालसी दयानंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धर्मपाल सिंह का मंतव्य है कि बच्चों का तापमान चेकिंग के बाद सैनिटाइज करने के बाद कक्षों में बैठाया जाएगा। चारों कक्षाओं में 442 विद्यार्थियों के अभिभावकों की अनुमति ली जाएगी। प्रारूप अभी कुछ अभिभावकों को दिए गए है।
क्या कहते हैं अभिभावक और छात्र
चरथावल। बिरालसी कॉलेज की कक्षा नौ में पढ़ने वाली छात्रा दिव्या कहती है कि ऑनलाइन पढ़ाई में बड़ी दिक्कतें है। मम्मी-पापा को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजने में कोई आपत्ति नहीं है। महाब्रह्मणान निवासी कक्षा 10 के छात्र युवराज और अनंत त्यागी कहते हैं कि स्कूलों में दोस्तों का साथ मिलेगा और ऑनलाइन क्लास में शोरगुल से मुक्ति के बाद बेहतर ढंग से विषय पर तैयारी करने का मौका मिलेगा।