बैंक में रुपये जमा करने के बाद मिलेगा स्टांप
मुजफ्फरनगर। नए शासनादेश के बाद जिले में स्टांप खरीदने के लिए भारतीय स्टेट बैंक में नकदी जमा करने का नया नियम लागू कर दिया गया है। जिससे सैकड़ों स्टांप विक्रेताओं में आक्रोश है। सोमवार को स्टांप विक्रेताओं ने बैंक में चालान जमा कराने की लंबी प्रक्रिया पर आक्रोश जताते हुए एडीएम वित्त से मुलाकात की।
प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव संजीव मित्तल ने पूरे प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी और कोषाधिकारियों को शासनादेश भेजकर स्टांप बिक्री संशोधन तत्काल अमल में लाने के निर्देश दिए हैं। जिसमें स्टांप खरीद के लिए ट्रेजरी में सीधे कोई नकदी जमा करने पर पाबंदी लगा दी गई है। स्टांप विक्रेताओं और स्टांप खरीदने वाले आमजन द्वारा खरीद की रकम का चालान भरकर ट्रेजरी से पास कराना होगा। वहां से भारतीय स्टेट बैंक शाखा में चालान शुल्क जमा किया जाएगा। बैंक से सूची आने के बाद अगले दिन स्टांप उपलब्ध कराया जाएगा।
स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया से दिक्कत होगी और वकीलों और वादकारियों को समय से स्टांप नहीं मिलेगा। कचहरी में 64, सदर तहसील के 60, जानसठ के 21 खतौली के 20 और बुढ़ाना के 11 एवं चार अन्य सहित कुल 176 स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस हैं। नए नियम से उनके समक्ष दिक्कत खड़ी हो गई है। हालांकि सदर तहसील में ई-स्टांप बिक्री के लाइसेंस दिए गए हैं। उनसे ई-स्टांप खरीदकर रजिस्ट्री कराने की सुविधा है। जिला स्टांप एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नरेंद्र गर्ग, वीरेंद्र गर्ग, रजनीश त्यागी आदि ने एडीएम वित्त आलोक कुमार से नए शासनादेश लागू होने पर ऐतराज जताया। एडीएम ने कहा कि शासनादेश को बदलना उनके हाथ में नहीं है। वह जो मांग पत्र देंगे, उसे शासन को भेज दिया जाएगा।
उधर, जिला कोषागार के मुख्य रोकड़िया तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि नए शासनादेश को लागू कर दिया गया है। बैंक में जमा रकम के वैरीफिकेशन के बाद ही स्टांप दिया जाएगा।