वह आठ माह की गर्भवती है। जिला अस्पताल में पहली बार चिकित्सा परामर्श के लिए आई थी। चिकित्सक ने जांच कराईं तो एचआईवी पॉजीटिव होने का पता लगा। डाक्टर के मुंह से यह खबर सुनी तो पैरों तले की जमीन खिसक गई और आसमान फट पड़ा। बेहोश होकर गिरने ही वाली थी कि नजदीक खड़े पति ने संभाल लिया। पेट में पल रहे आठ माह के बच्चे, पहाड़ से लंबे जीवन, गृहस्थी और समाज की चिंता ने सोचने-समझने की ताकत खत्म कर दी है। आगे क्या होगा पता नहीं। पति का सहारा है। परिवार वालों को अभी कुछ नहीं बताया।
स्वामी कल्याणदेव जिला अस्पताल में एचआईवी पीड़ित आठ माह की गर्भवती महिला अपनी दास्तां सुनाते हुए फफक पड़ी। पति साथ था। उनका यह पहला बच्चा है। शुरुआत में जांच नहीं कराई। अब पता लगते ही उपचार शुरू कर दिया है। चिकित्सक ने पति को भी जांच की सलाह दी है। उसके भी एचआईवी पॉजीटिव होने की पूरी आशंका है। महिला का कहना है कि उन्हें यह जानलेवा बीमारी कैसे लगी, इसका पता नहीं। पति-पत्नी एक-दूसरे को दोष दें यह भी ठीक नहीं। अब बेहतर है कि दोनों एक दूसरे का सहारा बनकर रहें। चिंता है तो बच्चे की। चिकित्सक ने दिसंबर में ही डिलीवरी की डेट दी है।
गर्भवती माता से बच्चे के संक्रमित होने की 35 प्रतिशत संभावना
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के फेसीलिटी इंटीग्रेटेड एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर (एफआईएआरटी) के प्रभारी डॉ. वीके जौहरी बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से बच्चे के पॉजीटिव होने की 35 प्रतिशत संभावना रहती है। यदि महिला शुरुआत में ही उपचार के लिए आ जाए तो यह संभावना 10-12 प्रतिशत रहती है। आठ माह की बजाय यदि महिला का तीसरे-चौथे महीने में उपचार शुरू हो जाता है तो बच्चे से यह खतरा काफी कम हो जाता। वह कहते हैं कि जिला महिला अस्पताल में एचआईवी संक्रमित महिलाओं की सिजेरियन और नॉर्मल दोनों तरह से डिलीवरी की व्यवस्था है।
बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हैं पीड़ित
जिंदगी के अरमानों को तोड़कर रख देने वाली एचआईवी (एड्स) बीमारी को साथ लेकर भी लोग जीवन जी रहे हैं। वे खुश हैं या नहीं इसका तो पता नहीं, लेकिन एड्स के बारे में खुलकर बात करते हैं। सरकार से मिल रहे उपचार ने उन्हें हौसला दिया है और घर परिवार के लोगों ने जीवन जीने का सहारा।
जिला अस्पताल में 1182 एचआईवी पीड़ितों का उपचार चल रहा है। उपचार करा रहे रोगियों में 60 से ज्यादा मरीज 60 से 70 वर्ष आयु के हैं। पांच मरीज 70 से ऊपर के हैं। नियमित उपचार की वजह से वह सामान्य जीवन जी रहे हैं, जबकि उपचार में लापरवाही बरतने वाले कुछ मरीज कम उम्र में ही अनेक बीमारियों की चपेट में आ गए। डा. वीके जौहरी बताते हैं कि मरीज रोग को छिपाए न, समय पर और नियमित उपचार करे तो वह अपनी सामान्य आयु लगभग पूरी कर लेता है।
वह बताते हैं कि एचआईवी का वायरस मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिससे उसे अनेक बीमारियां घेर लेती हैं। इस स्थिति को एड्स कहते हैं। उपचार से वायरस को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन रोककर रखा जा सकता है। अच्छे खानपान और उपचार से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
जिला अस्पताल में उपचार की पूरी व्यवस्था
जिला अस्पताल में एचआईवी के उपचार की पूरी व्यवस्था है। एचआईवी पॉजीटिव होने का पता लगने पर एफआईएआरटी सेंटर में उपचार शुरू हो जाता है। अस्पताल से वायरल लोड जांच की भी सुविधा मिल जाती है। यह एचआईवी की सबसे बड़ी जांच है। इससे शरीर में एचआईवी वायरस की संख्या का पता लगता है। उसी के हिसाब से एंटी रिट्रोवायरल दवाएं दी जाती हैं।
एचआईवी पॉजीटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों तथा हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- श्वांस की बीमारी एवं निमोनिया