मां बेटे की शव की जांच करते अधिकारी।
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खतौली में अपने जिगर के टुकड़े को मां मरते हुए नहीं देखना चाहती थी। एक तरफ मां की ममता थी तो दूसरी तरफ मौत। ट्रेन के नजदीक आने पर भी मां सामने से नहीं हटी। कुछ ही पल में ट्रेन हवा के झोंके की तरह दोनों को रौंदकर आगे निकल गई। घटना के बाद जब आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर दहल गए। मां का कटा हुआ हाथ बेटे के हाथ को पकड़े हुए था।
जगत कालोनी का मुनेंद्र उर्फ मोनू पुत्र सुदेश गुप्ता बृहस्पतिवार सुबह 5.30 बजे के करीब अपने घर से किसी बात से लड़ झगड़कर ट्रेन के नीचे आत्महत्या करने के लिए कहकर निकला था। बेटे के मुंह से आत्महत्या करने की बात सुनी तो मां 65 वर्षीय राखी गुप्ता उसे मनाने के लिए पीछे-पीछे चल पड़ी। कालोनी के सामने बेटा रेलवे ट्रैक के बीचोबीच आत्महत्या करने के लिए खड़ा हो गया था। मां भी वहीं पहुंच गई।
मां ने बेटे का हाथ पकड़ लिया और घर चलने के लिए मनाने की लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मां करीब आधा घंटे तक बेटे को घर चलने के लिए खींचती रही। मन्नतें करती रही, लेकिन बेटा टस से मस नहीं हुआ। सुबह के करीब 6.15 मिनट पर मुजफ्फरनगर की ओर से उधमपुर-कानपुर एक्सप्रेस ट्रेन आ गई। चालक ट्रेन की सीटी बजाता रहा। इसके बावजूद बेटा मोनू नहीं हटा। ट्रेन के आने पर मां ने उसका हाथ नहीं छोड़ा। पलभर में ही मां और बेटे को रौंदते हुए ट्रेन आगे निकल गई।
बेटे के चीथड़े उड़ गए। मां का आधा शरीर पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गया। मां के कटे हाथ में बेटे का हाथ था। लोग घटनास्थल पर पहुंचे। जिसने किसी ने भी मां-बेटे के शवों को देखा, उसका दिल दहल गया। मोनू परिवार में सबसे बड़ा था। उसका एक छोटा भाई और है। राखी का पति सुदेश गुप्ता सीताशरण इंटर कालेज से चपरासी के पद से सेवानिवृत्त हुआ था। मोनू के 13 साल की बेटी और पांच साल का बेटा है।