शुक्रताल में सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। घर में समृद्धि सुख-शांति के लिए भगवान सत्य नारायण और अमावस्या की कथा सुनी। नगर में मेले जैसा माहौल बना रहा।
धर्मनगरी शुक्रताल के गंगा घाट पर सोमवती अमावस्या को लेकर दूरदराज से आए हजारों श्रद्घालुओं ने हर-हर गंगे, हर महोदव के जयकारो के बीच आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। इस मौके पर श्रद्घालुओं ने गंगा घाट पर पुरोहितों और पंडों से भगवान सत्यनारायण और अमावस्या की कथा सुनकर पित्र तर्पण कर चावल, चीनी, दूध घी, पान सुपारी, लोंग आदि का दान करते हुए हवन यज्ञ में आहूति दी।
इसके बाद नगर के शुकदेव आश्रम स्थित प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर सप्त ऋषि श्री कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की। ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव समाधी स्थल पर पुष्पाजंलि अर्पित की। दण्डी आश्रम, हनुमानधाम, गणेशधाम, शिवधाम, दुर्गाधाम, पीताम्बराधाम, गौडिया मठ, शनिधाम, गायत्री धाम, महेश्वर आश्रम, तिलकधारी आश्रम, विष्णु लोक आश्रम, महाशक्ति सिद्वपीठ,
ब्राह्मण आश्रम, मानव निर्माण आश्रम आदि के मंदिरों के दर्शन किए। स्वामी ओमानंद महाराज, स्वामी गुरुदत्त महाराज, स्वामी कैश्वानंद महाराज, स्वामी वेददास महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, महानंद महाराज, गीतानंद गिरी, योगिनी माता राजनंदेश्वरी, भक्ति भूषण गोविन्द दास महाराज, कृपालदास महाराज, गोपालाचार्य महाराज, अजय कृष्ण आचार्य आदि से आशीर्वाद लेकर सत्संग में भाग लिया।