कहीं अस्पतालों से तो चोरी नहीं कराई जाती थी दवाइयां
मुजफ्फरनगर। गांव शेरनगर में इनाम के घर से बरामद दवाइयों में मिली दिल्ली सरकार की कोरोना की दवाइयां मिलने से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। जिला औषधि विभाग ने यह दवाई आरोपी के घर तक कैसे पहुंची, विभाग इसकी जांच में जुटा है।
गांव शेरनगर निवासी इनाम के घर से छापा में बरामद एक्सपायर दवाइयों में शामिल दिल्ली सरकार की नॉट फॉर सेल वाली कोरोना की दवाइयां मिलने से हर कोई सकते में है। दरअसल, ये दवाइयां केवल सरकारी अस्पतालों में ही इस्तेमाल की जा सकती हैं और संबंधित कंपनी नॉट फॉर सेल लिखीं इन दवाइयों को खुले मार्केट में या डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां सप्लाई नहीं कर सकतीं। ऐसे में औषधि विभाग के समक्ष बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से कोरोना मरीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाई आरोपी के घर तक कैसे पहुंचीं। इन्हें दिल्ली के अस्पतालों से चोरी कर यहां लाया गया या फिर दिल्ली सरकार का ही कोई कर्मचारी भी इन सरकारी दवाइयों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल है।
इन्होंने कहा .......
औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद का कहना है कि जांच के दौरान कुछ अहम दस्तावेज भी मिले हैं, जिनके आधार पर जांच की जा रही है। आरोपी पूछताछ में अपने बूते काम करने की जानकारी दे रहा है, लेकिन इतने बड़े खेल में किसी न किसी गिरोह का भी हाथ हो सकता है। कई बिंदुओं पर मामले की जांच की जा रही है। हालांकि जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
दूरदराज के देहात क्षेत्र में सप्लाई होतीं थीं दवाइयां
मुजफ्फरनगर। गांव शेरनगर निवासी इनाम के घर से मिलीं एक्सपायर दवाइयों को उनकी एक्सपायरी डेट केमिकल से मिटाने के बाद उन्हें री-प्रिंट किया जाता था। इसके बाद उन्हें दूरदराज के देहात क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर्स व मेडिकल स्टोरों पर सप्लाई किया जाता था। प्रथम दृष्टया जांच में आरोपी द्वारा जनपद के ही कई डिस्ट्रीब्यूटर्स से ये दवाइयां औने-पौने दाम में खरीदकर पुन: इस्तेमाल में लाए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में औषधि विभाग अब आरोपी को एक्सपायर दवाइयां बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स को चिह्नित करने के काम में जुटा हुआ है।