रजिस्ट्री कार्यालय पर सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी
मुजफ्फरनगर। तहसील सदर के रजिस्ट्री कार्यालय पर बैनामा कराने की मारामारी में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही है। ऑनलाइन समय लेने की स्थिति के बाद विभाग व्यवस्था को कंट्रोल नहीं कर पाया है। तहसील के अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक भीड़ के लिए अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कोरोना काल में प्रदेश सरकार ने तहसीलों में रजिस्ट्री को लेकर पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी थी, लेकिन जटिल व्यवस्था के चलते लोग इसका लाभ नहीं उठा पाए। इसके बाद जून और जुलाई माह में पुरानी व्यवस्था लागू कर दी गई। मुजफ्फरनगर जिले में डीएम सेल्वा कुमारी जे एक अगस्त से इस व्यवस्था को बदल दिया और बैनामा कराने के लिए पहले ऑनलाइन समय लेने का प्रावधान कर दिया। एक दिन में केवल 30 लोग ही रजिस्ट्री करा सकते थे। इस व्यवस्था में कुछ लोगों ने घुसपैठ करते हुए गलत तरीके से समय लेना शुरू कर दिया। हालत यह है कि पहले से ही तय समय पर जब कोई नहीं आता तो वह समय खाली रहता है और बाहर भीड़ लगी रहती है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को लौटना पड़ता है, जो कि बैनामा कराने आते हैं और नई व्यवस्था का उन्हें मालूम नहीं है। इससे न तो जनता का कार्य हो पा रहा है और न ही सरकार को राजस्व मिल रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ रही है।
समय किया जा रहा है खराब : प्रमोद
दस्तावेज लेखक संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद चौधरी का कहना है कि यहां सब सही चल रहा था, लेकिन एक अगस्त से जो व्यवस्था लागू की गई उसकी वजह से काम कम हो रहा है और भीड़ बढ़ रही है। डीएम को सही जानकारी न देकर भ्रमित किया गया है।
बैनामों की संख्या बढ़ा दी है: पुनीत
एआईजी स्टांप पुनीत कुमार का कहना है कि कोरोना को देखते हुए एक तहसील में केवल 30 लोगों को ही बैनामे का समय दिया जा रहा था। बैनामों की संख्या बढ़ाने के लिए सदर तहसील में एक दिन में 90 और अन्य प्रत्येक तहसील में 60 बैनामे प्रतिदिन कराने के आदेश दिए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लोग सोशाल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं।