सिद्धपीठ आनंद कुटी शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग
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भौराकलां। सिद्धपीठ आनंद कुटी शिव मंदिर श्रावण मास में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है। शाहपुर-भौंरा कलां मार्ग पर हिंडन नदी के किनारे कपूर गढ़ गांव का यह प्राचीन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों भक्तों की पूर्ण हुई मनोकामनाओं का गवाह है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने यहां भगवान शिव की आराधना कर यह पवित्र मंदिर स्थापित किया। इससे यह स्थान पौराणिक काल से ही ऋषि-परंपरा और तपस्या की भूमि के रूप में जाना पहचाना जाता है।
प्राचीन काल में यहां पर दंडी स्वामी आनंद बौद्ध आश्रम ने अपने जीवनकाल में 100 बार श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। इसी कारण इस स्थान को आनंद कुटीर और सप्त कुटी मंदिर जैसे नामों से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां कथा श्रवण और सेवा से भक्तो को जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त होती है।
मंदिर परिसर में स्थित दंडी स्वामी आनंद बौद्ध आश्रम महाराज की समाधि पर लोग रविवार को दीपक जलाने आते हैं। यहां आकर न केवल श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, बल्कि आत्मिक शांति और दिव्यता को भी महसूस करते हैं।
n मंदिर में दिव्य मूर्ति स्थापित : करीब चालीस वर्ष पूर्व दंडी स्वामी सुखदेवा नंद महाराज ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे एक भव्य स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने भगवान रुद्रावतार हनुमान, श्रीराम-जानकी-लक्ष्मण, मां दुर्गा, भगवान परशुराम आदि की अत्यंत आकर्षक मूर्तियों की स्थापना की, जो आज भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
ब्रह्मचारी जय राम मंदिर के संचालन और सेवा में लगे हैं। वह बताते हैं कि हरिद्वार के प्रसिद्ध भूमा निकेतन आश्रम के दिव्य संत ब्रह्मलीन लक्ष्येश्वर महाराज की इस मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा थी। उन्होंने अनेको बार श्रद्धालुओं को अपने धार्मिक प्रवचनों का रस पान कराया था ,उनका आशीर्वाद इस स्थान को और अधिक दिव्यता प्रदान करता है।