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माता-पिता की सेवा जीवन का सर्वोत्तम यज्ञ: अचल शास्त्री

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श्री शुकदेव आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा करते कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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माता-पिता की सेवा जीवन का सर्वोत्तम यज्ञ: अचल शास्त्री
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मुजफ्फरनगर, मोरना। भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित डोंगरेजी भागवत भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ ही फूलों की होली खेलकर किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।
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भागवत पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज के सानिध्य में विजयवर्गीय परिवार कोटा द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र, वेद स्तुति, यदुवंश संहार और परीक्षित मोक्ष की कथा का वर्णन किया। कथाव्यास ने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा व तप, त्यागमय व पारमार्थिक जीवन व्यतीत करना भागवत का मुख्य संदेश है। माता-पिता, गुरुजनों, तीर्थों, धर्म और असहायों की सेवा करना मानवता का सबसे बड़ा यज्ञ है। माता-पिता पेड़ की उस जड़ की तरह होते हैं, जिसके बिना पेड़ का कोई अस्तित्व ही नहीं होता है। मनुष्य के जीवनकाल में भागवत ज्ञानयज्ञ महा महोत्सव मूर्तरूप होना जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो हमारे पितर, देवताओं तथा ईष्ट गुरुदेव के आशीर्वाद से ही प्राप्त होती है। मुख्य यज्ञमान महावीर प्रसाद विजय, कमलेश विजय, मनोज विजय, एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय, अनिल विजयवर्गीय, संजय, विजय, शांति, सुषमा, रीता, संपदा और चंचल आदि का सहयोग रहा।

शुकदेव आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा में शामिल महिलाएं।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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