देवबंद। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर का कहना है कि रमजान को तीन हिस्सों में रखा गया है। जिसमें पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से निजात का होता है। पहला अशरा (दस दिन) समाप्त हो गया। अब मगफिरत का अशरा शुरू हुआ है। जिसमें अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता है।
बुधवार को रमजान माह पर रोशनी डालते हुए मौलाना नसीम ने कहा कि रमजान के शुरू के दस दिन गुजारने के बाद अब दूसरा अशरा शुरू हो चुका है। जिसे मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इसमें अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता है और उनके गुनाहों को माफ करता है। इसी तरह तीसरा अशरा यानि रमजान माह के अंतिम दस दिन जहन्नम से निजात के होते हैं। इसलिए सभी को चाहिए कि वह रमजान के दूसरे अशरे में कसरत के साथ कुरआन की तिलावत करें और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगे।