भूमाफिया की गतिविधियों पर कसेगी नकेल
मुजफ्फरनगर। भूमाफिया की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से डीएम सेल्वा कुमारी जे ने प्रदेश में पहला एंटी भूमाफिया सॉफ्टवेयर ‘धरा’ लांच किया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास एंटी भूमाफिया संबंधित सभी गतिविधियों को जियो फेसिंग तथा मल्टीपल ओवर ले के माध्यम से वेब एप्लीकेशन तथा ऐप फॉरमेट पर ऑनलाइन किए जाने के लिए किया गया है।
कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में ऐप को लांच करने के बाद डीएम ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा भूमाफिया के विरुद्ध किए जा रहे कार्रवाई को प्रभावी रूप से लागू करने में इससे मदद मिलेगी। साथ ही राजस्व अभिलेखों में की जाने वाले जालसाजी तथा फर्जी बैनामों के कारण उत्पन्न होने वाले अनावश्यक विवाद पर रोक लगेगी। सॉफ्टवेयर इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है कि ग्रामसभा की भूमि एवं अन्य शासकीय विभागों की भूमि का डाटा बेस खतौनियों में है, किन्तु एक स्थान पर डेटा बेस के रूप में नहीं है। विकास प्राधिकरण की भूमि एवं नगर पंचायत की सीमा के अंदर स्थित सरकारी भूमि का भी संयुक्त रूप से कोई डेटा बेस नही है। इससे ग्रामसभा की भूमि के अंतरण पर रोक लगेगी और ग्रामसभा की भूमि के विक्रय पर भी रोक लगेगी। ग्रामसभा की भूमि और अन्य शासकीय विभागों की भूमि की सुरक्षा भी रहेगी।
सॉफ्टवेयर में ग्रामसभा, सरकारी विभागों की भूमि एवं विकास प्राधिकरण और नगर पालिका एवं नगर पंचायत सीमा के अंदर स्थित भूमि का विवरण रहेगा। ग्रामसभा की भूमि के तहत सार्वजनिक उपयोग की भूमि यथा तालाब, चारागाह, खेत खलिहान, खाद् के गड्ढे, कब्रिस्तान, मरघट, हडवार इत्यादि शामिल हैं। सरकारी विभागों की भूमि के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, वन विभाग, शिक्षा विभाग, सहकारी समितियों की जमीन आती है। विकास प्राधिकरण की भूमि के तहत ग्रीन बेल्ट भूमि आती है। नगर पालिका एवं नगर पंचायत की सीमा के अंदर तालाब, मंदिर, मरघट, कब्रिस्तान, शत्रु संपत्ति इत्यादि भूमि आती है। उन्होंने बताया कि धरा साफ्टवेयर की मुख्य विशेषताएं यह है कि इसमें ग्रामसभा, शासकीय भूमि एवं विकास प्राधिकरण की भूमि का मैप के माध्यम से अथवा मौके पर जाकर मैपिंग की जा सकेगी। सॉफ्टवेयर में विभिन्न ग्राम सभा एवं शासकीय भूमि के कलर कोड भी दिए गए हैं, ताकि ग्रामसभा एवं शासकीय भूमियों की विभिन्न श्रेणियों की पहचान की जा सके।
पोर्टल पर जनसामान्य के लिए जनपद में स्थित भूमि के स्टांप रेट का विवरण भी उपलब्ध रहेगा। निबंधक विभाग के अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर उपलब्ध डाटा के माध्यम से सरकारी भूमि पर किए जाने वाले बैनामों पर रोक लगाई जा सकेगी। पोर्टल पर उपलब्ध सभी डाटा का स्वामित्व, नियंत्रण, प्रबंधन तथा सुरक्षा जिला प्रशासन के द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर सचिव एमडीए महेंद्र प्रसाद, अपर जिलाधिकारी आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन अमित सिंह, नगर मजिस्ट्रेट अभिषेक सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।