कवाल कांड में बचाव पक्ष की तरफ से अदालत में कराई गई सलीम की गवाही ने वादी पक्ष के तथ्यों और वारदात की सत्यता को पुष्ट कर दिया। सलीम ने जो बयान दिया, उसमें स्वीकार किया कि 27 अगस्त 2013 को कवाल में भीड़ ने मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या की। हालांकि उसने कातिलों की पहचान से इंकार किया। वादी रविंद्र सिंह की दोहरे हत्याकांड के वक्त घटनास्थल पर मौजूदगी को भी सलीम ने स्वीकार किया। अभियोजन पक्ष की कहानी को सलीम के बयान से मुकदमे में मजबूती मिली।
कवाल के दोहरे हत्याकांड में अभियोजन पक्ष ने 10 और बचाव पक्ष ने छह गवाह अदालत में पेश किए। वारदात 27 अगस्त, 2013 को हुई थी। वादी रविंद्र सिंह ने जानसठ कोतवाली में सचिन और गौरव की हत्या का मुकदमा संख्या 403/2013 दर्ज कराया था। 15 अप्रैल 2014 को केस में आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम हुआ। पांच साल चली सुनवाई में पुख्ता साक्ष्य, मजबूत पैरोकारी और हत्यारों से बरामद आला कत्ल ने कोर्ट में हत्याकांड में अभियोजन पक्ष के दलीलों को मजबूत किया।
मुकदमे में बचाव पक्ष की गवाही में केस के आरोपी जहांगीर और नदीम के पिता सलीम के बयान भी कराए गए। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने सलीम के बयानों के आधार पर वारदात की पुष्टि के तथ्यों को एडीजे कोर्ट संख्या- 7 के समक्ष साबित किया। सरकारी गवाह सलीम ने बयान में कहा कि वारदात से पहले दिन मुजस्सिम पुत्र नसीम की बाइक से गौरव की साइकिल टकराने पर कहासुनी हुई थी। अगले दिन भीड़ ने कवाल के चौहट्टा चौराहे पर सचिन और गौरव की हत्या कर दी।
वैसे उसने कातिलों की पहचान से इंकार कर दिया। सलीम ने बयान में कहा था कि घटनास्थल पर वादी और गौरव का पिता रविंद्र सिंह मौजूद था। उसके बयान में वारदात के दर्शाए वक्त पर भी विरोधाभास था। वादी पक्ष ने मुकदमे में घटना की जो कहानी बताई थी, उसे सलीम के बयान ने मजबूती दे दी। जिंदल के मुताबिक सलीम का घटनास्थल और साक्ष्य स्वीकार करना वादी के हक में गया। बताते चले कि वारदात के दिन आपसी झगड़े में सलीम के पुत्र शाहनवाज की भी मौत हुई थी, जिसकी हत्या का मुकदमा सीजेएम की अदालत में लंबित है।
वारदात की बर्बरता दर्शाते फोटो को कोर्ट में किया दाखिल
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में दोहरे हत्याकांड के बाद घटनास्थल का फोटो भी अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। वारदात के दिन सचिन और गौरव के शवों के पास वादी रविंद्र सिंह तथा सचिन के पिता बिशन सिंह बैठे हैं। वादी के अधिवक्ता ने दर्शाया कि पीड़ित पक्ष फोटो में असहाय और हताश नजर आ रहा है। यह तथ्य भी इंसाफ में काम आया।
जेल वार्डन की हत्या में भी आरोपी है सजा पाया मुजम्मिल
मुजफ्फरनगर। सजा सुनाई जाने के वक्त कोर्ट में बुलंदशहर जिला कारागार में बंद मुजम्मिल को पेश किया गया। पुलिस सुबह 9.30 बजे ही उसे लेकर कचहरी हवालात में पहुंच गई थी। अभियोजन पक्ष ने एडीजे कोर्ट के समक्ष उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुजफ्फरनगर में तैनात जेल वार्डन मथुरा निवासी चुन्नी लाल शर्मा की हत्या कराने में मुजम्मिल आरोपी है। विक्की गैंग के इशारे पर जेल वार्डन की हत्या कराई गई थी। उम्रकैद की सजा सुनाई जाने के बाद फैसले की प्रतिलिपि रिसीव कराकर कातिल को बुलंदशहर जेल के लिए भेज दिया गया।
मृत्युदंड को रखी गई याकूब मेनन केस की दलील
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर और शामली में दंगा भड़का था। सजा के प्रश्न पर वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने दोहरे हत्याकांड की तुलना याकूब मेनन बनाम महाराष्ट्र सरकार के केस से की। वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया। अपराध की गंभीरता और अपराधियों की मनोवृत्ति क्रूरतम है। घटना की वजह से हिंसा फैली, जिसमें 65 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। अदालत से इसी आधार पर हत्यारों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग रखी गई थी।