फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अदालत के फैसले के बाद मुजरिमों के परिजनों का हंगामा, फैसले के विरोध में जाएंगे हाईकोर्ट

Sat, 09 Feb 2019 01:17 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
अदालत के फैसले के बाद हंगामा करता एक दोषा का पिता। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के मामले में शुक्रवार को सभी सात मुजरिमों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई। मुजम्मिल व मुजस्सिम के पिता नसीम और जहांगीर, नदीम के पिता सलीम समेत परिजनों ने फैसले का विरोध करते हुए हुकूमत और पुलिस-प्रशासन के विरोध में जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने किसी तरह उन्हें समझा-बुझाकर शांत करते हुए कचहरी परिसर से बाहर निकाला।  बाद में नसीम ने फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में अपील किए जाने की बात कहते हुए कवाल के लिए रवाना हो गए।
विज्ञापन


शाहनवाज के हत्यारोपियों की भी हो गिरफ्तारी
मुजफ्फरनगर। सचिन-गौरव की हत्या में सात मुजरिमों को सजा सुनाए जाने के बाद उनके परिजनों ने कचहरी परिसर में हंगामा करते हुए शाहनवाज की हत्या में आरोपी बनाए गए छह लोगों की भी गिरफ्तारी की मांग की। नसीम अहमद व सलीम ने चीख-चीखकर कहा कि पुलिस-प्रशासन ने उनके बेकसूर बच्चों को सजा दिला दी, लेकिन शाहनवाज की हत्यारोपियों के एनबीडब्लू जारी होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। आरोप लगाया कि सचिन-गौरव ने अपने छह अन्य परिजनों के साथ मिलकर पहले शाहनवाज की हत्या की थी, जिनमें से सचिन-गौरव को भीड़ ने मार दिया, लेकिन उक्त छह आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए। जमकर हंगामे के बीच सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया ने नसीम अहमद को दो दिन में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी किए जाने का आश्वासन देकर बमुश्किल शांत किया।

मीडिया से धक्का-मुक्की, पक्षपात का आरोप
मुजफ्फरनगर। कचहरी परिसर में हंगामे-नारेबाजी के बीच मुजरिमों के परिजनों को बाहर लाते समय अचानक लोग उग्र हो गए। परिजनों व अन्य लोगों ने अचानक कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों से धक्का-मुक्की करते हुए उन पर भी पक्षपात किए जाने का आरोप लगा डाला।
विज्ञापन


तुम्हारे देश में हमारे लिए न्याय नहीं
मुजफ्फरनगर। सचिन-गौरव की हत्या में सजा का एलान होने के बाद कचहरी परिसर से बाहर आते हुए मुजरिम भाइयों मुजम्मिल-मुजस्सिम के पिता नसीम अहमद ने कहा, तुम्हारे देश में हमारे लिए न्याय नहीं है। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, तो उसके साथ मौजूद अन्य लोग भड़क उठे। स्थिति बिगड़ती देख मुजरिमों के परिजन बैकफुट पर आए और वहां मौजूद सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया से शाहनवाज के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग की, जिस पर उन्होंने दो दिन का आश्वासन देकर उनसे बाद में इस बारे में मिलने की बात कहकर उन्हें वहां से भेज दिया।

मुजफ्फरनगर दंगे के दर्द को कभी भूल नहीं पाएंगे
शाहपुर। सांप्रदायिक हिंसा के साढ़े पांच साल बीतने के बावजूद आज भी क्षेत्र के लोग हिंसा व कत्लोगारत का वह मंजर याद कर सिहर उठते हैं। सात सितंबर 2013 को सिखेड़ा के गांव नंगला मंदौड़ में आयोजित बहू-बेटी सम्मान बचाओ महापंचायत से लौटते लोगों पर पुरबालियान गांव में हुए हमलों में गांव काकड़ा के विकास, महेंद्र, राजवीर और सोरम निवासी विपिन की मौत हुई थी। उक्त हमले में मारे गए लोगों के परिजन आज भी दंगों की याद कर सिहर उठते हैं। वहीं, हमले में मारे गए सोरम गांव निवासी विपिन के भाई तेजपाल का कहना है कि दंगे में उन्होंने अपना भाई खोया है, जिसके दर्द को वह भुला नहीं सकते।

पुरबालियान में हुए हमले में विकास (21) को उसके पिता जवाहर सिंह की आंखों के सामने ही मौत के घाट उतार दिया गया था। जवाहर सिंह ने नम आंखों से बताया कि जिस समय हमला हुआ, सभी लोग हंसी-खुशी एक-दूसरे से बात कर ट्रैक्टर-ट्रॉली में नंगला मंदौड़ से लौट रहे थे। किसी को यकीन नहीं था कि पुरबालियान में उनके ऊपर घेरकर हमला किया जा सकता है। कत्लोगारत का वह मंजर आजीवन नहीं भूल सकेंगे, जिसमें बेटे की मौत होने के साथ ही कई लोग घायल भी हो गए थे।

उन्होंने कहा कि कवाल में ममेरे भाइयों सचिन व गौरव की हत्या में दोषियों को आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा से बेबस परिजनों को न्याय मिलेगा। उन्होंने बेटे विकास की हत्या के मामले में भी तेजी से सुनवाई पूरी होकर जल्द निर्णय दिए जाने की मांग की। भीड़ के हमले में मारे गए काकड़ा के ही महेंद्र व राजवीर के परिजन भी अब तक इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

दोनों के परिजनों का कहना है कि कवाल कांड में सजा से ममेरे भाइयों के परिजनों को इंसाफ मिला है। वहीं, हमले में मारे गए सोरम गांव निवासी विपिन के भाई तेजपाल का कहना है कि दंगे में उन्होंने अपना भाई खोया है, जिसके दर्द को वह भुला नहीं सकते। कवाल कांड के दोषियों को मिली सजा से पीड़ित परिजनों की जीत हुई है।

उधर, महापंचायत से लौटते लोगों पर हुए हमलों की प्रतिक्रिया के चलते क्षेत्र के गांव कुटबा में भी हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें शमशाद, इरशाद, वहीद, एजाजूदीन, तराबूदीन, कय्यूम, मोमीन व खातून को जान गंवानी पड़ी थी। नतीजतन अगले ही दिन विशेष समुदाय के लोगों ने गांवों से पलायन कर राहत शिविरों में शरण ली थी। इस दौरान गांव पलड़ा में दंगा विस्थापितों की बस्ती अहमदनगर में रहने वाले कदमुद्दीन ने बताया कि दंगे में उसकी पत्नी खातून की मौत हो गई थी।

कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है। कोर्ट शीघ्र सुनवाई कर उनकी पत्नी के कातिलों को सजा देगी। उधर, दंगों में मोहल्ला कस्सावान की नई बस्ती निवासी पति तराबूद्दीन को खोने वाली उसकी पत्नी संजीदा ने बताया कि दंगे में उसने पति तराबुदीन को खो दिया था । पीड़ित बुजुर्ग महिला का कहना है कि दंगे को साढ़े पांच साल बीत गए, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

मोहम्मदपुर रायसिंह व हड़ोली में हुई थी दो लोगों की हत्या
भौराकलां। कवाल कांड में सचिन-गौरव की हत्या के बाद भड़की हिंसा ने क्षेत्र के तीन गांवों को चपेट में ले लिया था। क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर रायसिंह निवासी रहीसूद्दीन और गांव हड़ोली निवासी जुम्मा को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। दंगे के कुछ समय बाद अक्तूबर 2013 में गांव मोहम्मदपुर रायसिंह निवासी किसानों पर हमला करने के आरोप में हुसैनपुर कलां निवासी मेहरबान, अजमल व अमरोज की हत्या भीड़ द्वारा कर दी गई थी, जिससे एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। इसमें दस से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें