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बोले स्वाती ओमानंद, आत्म उन्नति का सर्वोत्तम साधन है श्रीरामकथा

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मोरना में श्रीराम कथा में ब्रह्म ऋषि डॉ. सुरेश महाराज को दुपट्टा ओढोकर समानित करते स्वामी ओमानन्? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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बोले स्वाती ओमानंद, आत्म उन्नति का सर्वोत्तम साधन है श्रीरामकथा
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम के प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में चल रही श्रीराम कथा में स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि आत्म उन्नति के जितने भी साधन हैं, उनमें श्रीराम कथा सर्वोत्तम, सरल, सुविधाजनक और सबसे अधिक फलदायी है।
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करोली धाम जयपुर से पधारे ब्रह्मऋषि डॉ. सुरेश महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीरामकथा में सोमवार को भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने रामायण पोथी का पूजन किया। तत्पश्चात श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि श्रीरामकथा राजा से लेकर रंक तक और विद्वान से लेकर निरक्षर तक सभी के लिए कल्याणकारी है। श्रीरामकथा जीवन में सत्य और मर्यादा का आचरण करना सिखाती है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम का अवतरण पृथ्वी पर धर्म, शांति, सत्य और मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने ब्रह्मऋषि डॉ. सुरेश महाराज को उनके 87वें जन्म दिवस पर दुपट्टा, अंगवस्त्र व फल-मिष्ठान भेंट कर उनके स्वस्थ दीर्घायु जीवन की मंगल कामना की। इस दौरान कथाव्यास कान्हा महाराज, रमेश यादव, अवधेश यादव के साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व दिल्ली से आए श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा विश्राम पर श्रीशुकदेव अन्नक्षेत्र में भंडारे का भी आयोजन किया गया।
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