कोर्ट का फैसला जानने को रिया के परिजन भी कचहरी में ही मौजूद रहे। तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने पर परिजनों ने इस इंसाफ की जीत बताया। मृत रिया के पिता सुरेशपाल ने कोर्ट का फैसला आने पर कहा कि हमें इंसाफ मिला। हालांकि न्याय मिलने में काफी देरी हुई। अदालत का निर्णय हमें मंजूर है। परिवार को न्यायालय पर पूरा भरोसा था कि हमें न्याय मिलेगा।
यदि सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील हुई तो, के सवाल पर पिता ने कहा कि अब हमें आगे कुछ नहीं करना है। इस दौरान रिया का ताऊ नरेश के अलावा प्रमोद, रमेश आदि परिजन मौजूद रहे। उधर, कोर्ट का फैसला आने पर मुंडभर में दोनों पक्षों के यहां रिश्तेदार मौजूद रहे। कोर्ट के फैसले को लेकर गांव में किसी प्रकार की कोई चर्चा ग्रामीणों के बीच देखने को नहीं मिली।
रिया के माता-पिता को मिलेंगे दो लाख रुपये
अदालत ने तीनों गुनहगारों को उम्रकैद के साथ विभिन्न धाराओं में 3.95 लाख रुपये का जुर्माना किया है। तीनों को धारा 302 में आजीवन कारावास व एक-एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 307 में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 452 में तीन-तीन साल कारावास व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना तथा ललित को 25/27 आर्म्स एक्ट में तीन साल का कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने कुल जुर्माने की धनराशि 3.95 लाख रुपये में से 1.50 लाख रुपये मुकदमे के वादी रिया के पिता सुरेशपाल को और 50 हजार रुपये गंभीर घायल हुई उसकी मां अनीता को देने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने केस को विरल से विरलतम नहीं माना
अदालत ने रिया हत्याकांड को विरल से विरलतम श्रेणी का केस नहीं माना। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इस मुकदमे को इसी श्रेणी का बताते हुए दोषी ठहराए गए गुनहगारों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग अदालत से की। कोर्ट ने अपने 40 पेज के निर्णय में केस को इस श्रेणी का नहीं मानते हुए तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
एडीजे प्रथम वीर नायक सिंह की अदालत में गुरुवार दोपहर सवा बारह बजे तीनों दोषियों की सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। सीबीआई के लोक अभियोजन अधिकारी दर्शन सिंह और अभियोजन की ओर से एडीजीसी जितेंद्र त्यागी, आशीष त्यागी एवं वादी के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने इस केस को विरल से विरलतम श्रेणी का बताते हुए तीनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की।
कहा कि रिया होनहार छात्रा थी, हाईस्कूल में भी वह टॉपर रही, उसने पिता की जान बचाते हुए अपनी जान दी, जिस पर बचाव पक्ष ने अदालत से कम से कम सजा की मांग की। बचाव पक्ष ने कहा कि दोषी ठहराए गए तीनों आपस में सगे भाई हैं, जो खेती किसानी करते हैं। सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों को सुनते हुए कोर्ट ने इस केस को विरल से विरलतम श्रेणी का नहीं माना। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मां की हालत बिगड़ी, कहा निर्दोष हैं बेटे
गुरुवार को कोर्ट में सजा पर सुनवाई के दौरान रोहताश, सुनील, ललित के परिजन भी कोर्ट के बाहर थे। उन्हें कोर्ट के फैसले का इंतजार था। कोर्ट का फैसला आने पर उनकी मां राजवीरी की हालत अचानक बिगड़ गई। कहा कि बेटे निर्दोष हैं। परिजन उसे वहां से ले गए। साथ में आए परिजनों से जब अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की बात पूछी गई, तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। सजा सुनाए जाने पर तीनों भाइयों के चेहरे पर उदासी थी। कोर्ट के फैसले के बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया।
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