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मदरसों को बंद करने के फैसले पर नाराजगी

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मौलाना सैयद अरशद मदनी - फोटो : DEVBAND
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देवबंद(सहारनपुर)। असम सरकार की सरकारी मदरसों को बंद किए जाने की घोषणा पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि यह उन फिरकापरस्त लोगों का फैसला है जिन्होंने पूर्व में तब्लीगी जमात को भी निशाना बनाया था।
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शनिवार को मौलाना सैयद अरशद मदनी ने फैसले की निंदा करते हुए कहा कि असम सरकार का मकसद मुसलमानों को मजहबी एतबार से मायूसी का शिकार बनाना और उन्हें यह अहसास कराना है कि उनके लिए मजहब पर चलना आसान नहीं है। मौलाना मदनी ने कहा कि मुस्लिम कौम आज से नहीं बल्कि हजारों सालों से मुल्क में रहती है। वो अपने दीन के मसले में किसी की मोहताज नहीं हैं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी है। मुल्क के अंदर हजारों मदरसे चल रहे हैं। हालांकि इस वक्त ये कौम बदहाली का शिकार है, मगर उसके बावजूद अपने दीन पर कायम है और अपने मदारिस व मस्जिदों को जिंदा रखे हुए है। उन्होंने कहा कि अगर यह दो चार फीसद मदरसे भी हुकूमत की फिरकापरस्ती का शिकार हो जाते हैं तो मैं समझता हूं कि मुसलमानों को और अधिक ताकत के साथ इन मदरसों की मदद करनी चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि जब चुनाव का समय करीब आता है तो इस तरह के मसले खड़े किए जाते हैं। हो सकता है कि यह भी चुनावी कार्ड हो।
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