दूधली गांव में प्रदूषण मुक्ति के लिए माता की ज्योत की कड़ाही घुमाते युवा।
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पर्यावरण संतुलन के लिए घर-घर परिक्रमा कराई मां की ज्योत
चरथावल। दूधली गांव की अतीत ऐतिहासिक है। यहां दुर्गा मंदिर में ग्रामीण युवा हर वर्ष नवरात्रों के पहले दिन पूरे गांव में मां की ज्योत की परिक्रमा कराते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए गुगल, लोबान, कपूर और सामग्री से मां की ज्योति से ज्योत जलाकर गांव के हर घर में घुमाया जाता है।
शनिवार को दुर्गा मंदिर में देवी मंडपों पर शैलपुत्री की आराधना की गई। वहां से पावन ज्योत को कढ़ाई में लेकर कमेटी से जुड़े पहले नवरात्र पर कुलदीप सिंह, रामभूल सिंह, शक्ति, मोहित, राजू और शिव कुमार और अशोक कुमार ने गांव के हर घर में घुमाया। आरएसएस नेता उदय सिंह ने बताया कि 35 साल पहले उनके पिता पूर्व सैनिक इंद्र सिंह पुंडीर द्वारा गांव में प्रदूषण मुक्ति और अनेक व्याधियों को दूर करने के लिए इस परंपरा की शुरूआत की थी। उन्होंने देवी मंदिर के निर्माण के बाद पूरे गांव को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए शारदीय और चेत्र नवरात्रों में कढ़ाई घुमाने की पहल की। बुजुर्ग मा. रामपाल सिंह बताते हैं कि मां की ज्योत की परिक्रमा से श्रद्धालुओं में ऊर्जा का संचार होता है। उधर, हैबतपुर, चरथावल प्राच्य देवी मंदिर, कुटेसरा आदि मंदिरों में शैलपुत्री की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने देवी का भव्य मंडप सजाकर व्रत रखें।