मुजफ्फरनगर। जनपद का समस्त पुलिस-प्रशासन निजी कोविड सेंटर चला रहे एक डॉक्टर के आगे समर्पण कर बैठा। बृहस्पतिवार को हॉस्पिटल में जिस मरीज की मौत हुई, उसके परिजनों के खिलाफ ही देर रात रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। वहीं, पीड़ित परिजनों द्वारा दी गई तहरीर अफसरों की फाइलों में दबकर रह गई, जिस पर देर रात तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शहर के आर्यपुरी स्थित एक निजी कोविड हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद हुए हंगामे और फायरिंग के बाद पुलिस-प्रशासन कोविड हॉस्पिटल संचालक के समक्ष आत्मसमर्पण कर बैठा। मामले में शहर कोतवाली में देर रात ही हॉस्पिटल संचालक डॉ. देवेंद्र सैनी की तहरीर पर पीड़ित परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। इसमें हॉस्पिटल में जान गंवाने वाले मरीज एनके गुप्ता के पौत्र अर्चित गुप्ता को नामजद करने के साथ ही पांच अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है। मुकदमे में जो धाराएं पीड़ित परिजनों पर लगाई गईं, वे बड़े दंगे-फसाद में लगाए जाने वाली रहीं। यही नहीं, पुलिस-प्रशासन की बेचारगी भी नजर आई, जब पीड़ित परिवार द्वारा दी गई तहरीर को फाइलों के ढेर तले दबाकर छोड़ दिया गया।
शुक्रवार सुबह दी गई तहरीर के बावजूद देर रात तक पुलिस ने हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ किसी तरह की भी कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिससे आम जनमानस में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वहीं, इस मामले में फजीहत होती देख पुलिस-प्रशासन से जुड़े किसी भी अफसर या कर्मचारी ने फोन तक उठाने से भी पीछे हट रहे हैं।