मुुआवजे के लिए धरना देते परिजन।
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किसान कामगार एवं उपभोक्ता कल्याण समिति ने दंगे में घायल होने के बाद कोमा में गए और फिर हुई मौत के मामले में मेहर आलम को दंगे में मरे लोगों के बराबर परिजनों को मुआवजा और उसके बेटे को नौकरी देने की मांग की। मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन दिया।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि शहर में सांप्रदायिक दंगे सात सितंबर 2013 से हुए। इसी दिन शाम के समय पुताई मजदूर मेहरआलम को दंगाइयों ने मारपीट कर घायल कर दिया। जिला अस्पताल में उपचार के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। वहां मेहरआलम कोमा में रहा। 18 अप्रैल 2016 को मेरठ मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हुआ।
19 अप्रैल 2016 को उसका इंतकाल हो गया। मेहर आलम की मौत दंगे में घायल होने के बाद हुई है। उसके परिजनों को दंगे के मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। धरना देकर ज्ञापन देने वालों में मृतक मेहरआलम की पत्नी मुसर्रत जहां, ओमदत्त त्यागी, असलम, नरेंद्र त्यागी, राजेश्वरदत्त त्यागी, आसिफ अली अल्वी, आरके पाल, जमालुद्दीन शाह, आसिफ, आदेश त्यागी आदि मौजूद रहे।