मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में आंदोलनकारियों से फर्जी तरीके से हथियार बरामदगी दर्शाने के प्रकरण में तीनों दोषियों ने 25-25 हजार रुपये की जमानत दाखिल की। दोषियों ने कहा कि फैसले के खिलाफ सेशन न्यायालय में अपील करेंगे। उधर, सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में छह जुलाई को सुनवाई होगी।
एसीजेएम-1/विशेष न्यायालय सीबीआई कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने झिंझाना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजकिशोर, सिपाही उमेश चंद एवं अनिल कुमार को डेढ़-डेढ़ साल कारावास की सजा एवं 21-21 हजार रुपये की सजा सुनाई थी। अभियुक्तों को निजी मुचलकों पर छोड़ दिया गया था। बुधवार को दोषियों ने जमानतें दाखिल की। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अब अपील दाखिल की जाएगी।
ये था मामला
अलग राज्य निर्माण की मांग के लिए दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को एक अक्तूबर 1994 की रात को रामपुर तिराहा पर रोककर बर्बरता की गई थी। दो अक्तूबर को पुलिसकर्मियों ने छपार थाना क्षेत्र में सुबह सात बजे बागोवाली पुलिया के पास आंदोलनकारियों की बसों की चेकिंग की थी। तीन बसों से चार तमंचे, खुखरी और कारतूस बरामद दिखाए थे। सीबीआई ने हथियारों की बरामदगी को फर्जी पाते हुए शामली जिले के झिंझाना थाने के तत्कालीन उप निरीक्षक गाजियाबाद के प्रताप विहार निवासी ब्रज किशोर, मेरठ निवासी सिपाही अनिल कुमार, मेरठ में रह रहे सिपाही उमेशचंद और कमल किशोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। ट्रायल के दौरान कमल किशोर की मौत हो गई।