- संतों ने दी अनिश्चितकालीन उपवास और देहदान की चेतावनी
- प्रशासन पर लगाया लापरवाही और आस्था से खिलवाड़ का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में श्री गंगा सेवा समिति के तत्वावधान में बाण गंगा में जल स्तर बढ़ाने को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने पर पहुंचे हनुमद्धाम के महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि संतों के अस्तित्व का सवाल है। शुकतीर्थ का अस्तित्व गंगा से जुड़ा है। संतों की सरकार में संत गंगाजल स्तर को लेकर जोखिम भरा कदम उठाता है तो उसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगा।
धरने पर रामानुज कोट आश्रम के स्वामी विष्णु आचार्य ने कहा कि शुकतीर्थ भागवत की उद्गम स्थली है, जिसके चलते नगरी में वर्ष भर श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन होता है। अध्यक्षता कर रहे सिद्ध पीठ मां अन्नपूर्णा गिरी आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज ने कहा कि बाण गंगा के जल स्तर को लेकर शासन प्रशासन गंभीर नहीं है। दंडी आश्रम के प्रबंधक मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि दंडी स्वामी अनिश्चितकालीन उपवास कर देहदान करने को तैयार हैं।
योगी महाराज ने आश्वासन पूरा किया, लेकिन प्रशासन धोखाधड़ी कर रहा है। स्वामी भजनानंद महाराज, बाबा कृपालदास महाराज, स्वामी विज्ञानंद महाराज आदि ने भी संबोधित किया। धरने पर सिंचाई विभाग मेरठ के सहायक अभियंता वीरेंद्र कुमार, अवर अभियंता संजीव मलिक, मनोज राठी तथा तहसीलदार जानसठ राधेश्याम गौड़, राजस्व निरीक्षक सुनील शर्मा पहुंचे। संतों ने धरने पर बड़े अधिकारी को बुलाने की मांग की।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता से नाराजगी जताई
धरने के दौरान संतों ने जब सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता वीरेंद्र कुमार से जल स्तर के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि जल वृद्धि परियोजना की फाइल अभी अधूरी है। जिस पर संत नाराज हो गए। संतों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी परियोजना का शुभारंभ कर चुके हैं, इसमें लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
यह रहे मौजूद
श्रीकृष्ण धाम के परमाध्यक्ष आचार्य इंद्रपाल सिंह, महामंत्री महकार सिंह, उपाध्यक्ष अरुण गर्ग, आचार्य प्रेमशंकर मिश्र, मैनेजर देवेंद्र आर्य, सुरेंद्र सिंह, भरत दास महाराज, पत्थरपुरी, शंकर गिरी, भैयाराम, शिवपुरी, अनिल दास, रामगिरी, महेश कुमार आदि मौजूद रहे।