अभिभावकों पर बनाया जा रहा फीस जमा करने का दबाव
खतौली। सूबे की भाजपा सरकार के आदेश पर स्कूल और कॉलेज खुल गए। बच्चों की संख्या अभी भी कई स्कूलों में बहुत कम है। इसका मुख्य कारण लगातार अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाया जाना माना जा रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि लोगों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए कोराना काल के दौरान की फीस निजी स्कूल को संचालकों को माफ कर देना चाहिए।
क्या कहते हैं अभिभावक
अशोक विहार निवासी सत्येंद्र कुमार का कहना है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों पर ऑनलाइन के समय से ही लगातार फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि अभी अभिभावक फीस पूरी जमा कराने की स्थिति में नहीं है। स्कूल खुलने के बाद फीस का दबाव दोगुना हो गया है।
बुआडा खुर्द निवासी सचिन खारी का कहना है कि कोरोना काल के बाद आम आदमी की कमर टूट चुकी है। ऐसी स्थिति में स्कूल संचालकों को भी अभिभावकों की समस्या समझते हुए फीस किस्तों में लेनी चाहिए।
लिसोड़ा निवासी डॉ. राजेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल संचालकों को अभिभावकों को राहत देते हुए फीस में छूट देनी चाहिए।
क्या कहते हैं कॉलेज प्रधानाचार्य
सतगुरु मॉडन पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सूरज सिंह का कहना था कि यह बात सही है कि कोरोना काल के बाद अभिभावकों की अर्थिक स्थिति खराब हुई, लेकिन स्कूल संचालक भी परेशान है। फीस न आने के कारण स्कूल के अध्यापकों की सेलरी नहीं दी जा रही है। स्कूलों का खर्च निकाल पाना भी मुश्किल हो रहा है।