दो फागिंग मशीनों के सहारे पांच लाख की आबादी
मुजफ्फरनगर। शहर की पांच लाख से अधिक की आबादी और पचास वार्ड होने के बाद भी डेंगू मच्छर मारने के लिए यहां केवल दो मशीन लगाई गई हैं। पालिका के पास पांच मशीन है, जिनमें से तीन कई माह से खराब हैं। पालिका का अभियान केवल वीआईपी तक सिमट कर रह गया है। हालाकि अभियान में पालिका अब तक लाखो खर्च कर चुकी है।
जिले मेें डेंगू महामारी के रूप में लोगों को जकड़ रही है। नवंबर माह आधा बीतने को है, लेकिन डेंगू की बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक फुल हैं। नगर पालिका ने डेंगू मच्छर से निपटने के लिए फॉगिंग के लिए पांच मशीनें खरीदी थी। शहर की पांच लाख की आबादी और 50 वार्डों के बाद भी इस व्यवस्था से काम चलाने की तैयारी थी, लेकिन तीन मशीन कई माह से खराब पड़ी है। इन मशीनों को ठीक ही नहीं कराया गया। पालिका ने डेंगू का प्रकोप रोकने को किंग-फोग दवा 2140 रूपए लीटर तय की थी। अब तक 40 लीटर से अधिक दवा खरीदी जा चुकी है। 20 लीटर डीजल में यह 200 एमएल डाली जाती है। सवाल यह है कि दो मशीन कहां फॉगिंग कर पाएगी। प्रतिदिन दो से तीन वीआईपी के फोन आ जाते हैं। अफसरों और नेताओं के यहां से ही मशीन को फुर्सत नहीं मिलती। जिस कारण आम जनता तक मशीन पहुंच ही नहीं पाई है। यही कारण है कि शहर में डेंगू लगातार बढ़ता जा रहा है।
जब एंटी लार्वा नहीं तो कैसे रुकता प्रजनन
शहर की नालियों में डेंगू की प्रजनन प्रक्रिया को रोकने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव होना था। इस बार मशीनें खराब होने के कारण वार्डों में अभियान चल ही नहीं पाया। इस कारण डेंगू मच्छर की संख्या बढ़ती चली गई।
हमारी तीन मशीन खराब
नगर पालिका के स्टोर पर कार्य करने वाले संदीप यादव ने बताया कि शहर में केवल दो मशीन ही फॉगिंग कर पा रही है। इनमें एक बड़ी और एक छोटी मशीन है। तीन मशीन खराब है जो ठीक नहीं कराई गई हैं।
बोर्ड बैठक में चिल्लाते रहे सभासद
सभासदों ने बोर्ड बैठक में आरोप लगाया था कि शिकायत के बाद भी उनके वार्डों में फॉगिंग मशीन नहीं आई। जनता बीमारी के कारण चिल्ला रही है, हमारी कोई सुनने वाला नहीं है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी को लिखे कई पत्र: अंजू
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि शहर में एंटी लार्वा के छिड़काव को लेकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी को वह कई पत्र लिख चुकी है। बोर्ड बैठक में भी सभासदों को इसी बात पर गुस्सा था कि उनके वार्डों न सफाई हो पा रही थी और न ही दवा का छिड़काव। इसीलिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कार्य मुक्ति का प्रस्ताव किया।