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Muzaffarnagar News: मीरापुर मुस्लिमों की पहली पसंद...बुढ़ाना पर दावे से दूरी

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मुजफ्फरनगर। पिछले दो विधानसभा चुनाव से जीत हासिल नहीं कर पाए मुस्लिम उम्मीदवारों की नजर इस बार मीरापुर विधानसभा सीट पर है। बुढ़ाना सीट पर दावेदारी छोड़कर मीरापुर पहली पसंद बन रही है। भाजपा ने वर्ष 2017 की लहर के बावजूद यहां सिर्फ 193 वोट से जीत दर्ज की थी। इस जीत के अलावा अकेले दम पर यहां कभी भाजपा असरदार नहीं दिखी। यही वजह है कि सपा के मुस्लिम नेताओं ने मीरापुर का रुख करना शुरू कर दिया है।
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परिसीमन के बाद मीरापुर में वर्ष 2012 के पहले चुनाव में बसपा के जमील अहमद कासमी ने 56802 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। भाजपा के डॉ. वीरपाल निर्वाल को 25689, रालोद की मिथलेश पाल को 44069 और सपाो मेहराजुद्दीन को 21083 वोट मिले थे।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वर्ष 2017 में हुए चुनाव में भाजपा के अवतार भड़ाना को 69035 और सपा के लियाकत अली को 68842 वोट मिले। भाजपा ने 193 वोट से जीत दर्ज की लेकिन लहर के बावजूद सपा के वोट लामबंद रहे। रालोद की मिथलेश पाल को 22751, बसपा के नवाजिश आलम खान को 39689 वोट ही हासिल हुए थे। वर्ष 2022 में सपा-रालोद गठबंधन हुआ। रालोद के टिकट पर यहां चंदन चौहान 107421 वोट लेकर विधायक चुने गए। भाजपा के प्रशांत चौधरी 80041 वोट ही हासिल कर पाए थे। चंदन चौहान के बिजनौर से सांसद बन जाने के बाद हुए उप चुनाव में भाजपा-रालोद गठबंधन ने रालोद के टिकट पर मिथलेश पाल को टिकट दिया और वह विधानसभा पहुंच गईं। सपा से पूर्व सांसद कादिर राना की पुत्रवधू सुम्बुल राना चुनाव हार गई थीं।
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मामूली अंतर से 2017 की जीत छोड़ दें तो इस सीट पर भाजपा के लिए हमेशा मुश्किलें खड़ी होती रही हैं। मुस्लिम मतों की लामबंदी और टुकड़ों में दूसरी बिरादरियों के प्लस वोट सपा के लिए मजबूत समीकरण बनाते हैं। सपा से टिकट के दावेदार यहां मुस्लिम-गुर्जर समीकरण बनने की उम्मीद भी लगाए बैठे हैं।
मुजफ्फरनगर दंगे के सबसे ज्यादा असर वाली बुढ़ाना सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी को संघर्ष ही करना पड़ा है। 2012 में भाजपा से उमेश मलिक, रालोद से राजपाल बालियान और बसपा से योगराज सिंह चुनाव लड़े। तीनों में वोटों का बड़ी संख्या में बंटवारा हुआ तो सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नवाजिश आलम को जीत मिली थी। वर्ष 2017 में भाजपा के उमेश मलिक जीते लेकिन सपा के प्रमोद त्यागी ने यहां टक्कर दी थी। बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी पूर्व सांसद कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम को सिर्फ 30034 वोट ही मिले थे। रालोद के योगराज सिंह को सिर्फ 23732 वोट मिले थे। वर्ष 2022 में सपा-रालोद गठबंधन से राजपाल बालियान चुनाव जीते और भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2027 में भाजपा-रालोद गठबंधन के साथ चुनाव होगा। ऐसे में मुस्लिम प्रत्याशी अपनी-अपनी जमीन तैयार करने में जुटे हैं।
सपा के दावेदारों में पूर्व सांसद कादिर राना, सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी एडवोकेट, मेहराजुद्दीन, लियाकत अली समेत अन्य नेताओं ने टिकट का दावा मीरापुर सीट पर ही करना शुरू किया। बुढ़ाना सीट पर सपा से जिला बार संघ के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने फिर से अपनी दावेदारी शुरू कर दी है।
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इनसेट

मोरना/मीरापुर से जीते मुस्लिम विधायक
साल पार्टी विधायक
1980 जनता एस मेहंदी असगर
1985 कांग्रेस सईदुज्जमां
1989 जनता दल अमीर आलम

2007 रालोद कादिर राना
2012 बसपा जमील अहमद
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इनसेट
बुढ़ाना सीट से एक बार मिली जीत
परिसीमन के बाद बनी बुढ़ाना विधानसभा सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी एक बार ही जीत हासिल कर सका है। सपा के टिकट पर वर्ष 2012 में नवाजिश आलम खान चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे लेकिन इसके बाद वर्ष 2017 और 2022 के चुनाव में यहां पर मुस्लिम उम्मीदवारों को कामयाबी नहीं मिली।
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